राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि सीआरपीसी की धारा 372 में किए गए संशोधन के तहत आपराधिक मामलो में पीड़ित पक्ष को दिए गए अपील के अधिकार को प्रकरण में दिए गए फैसले के दिन से तय किया जाए। ये आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग, न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश वीके व्यास की वृहदपीठ ने यह आदेश खंडपीठ की ओर से भेजे गए कानूनी बिंदु को तय करते हुए दिए।
अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने बताया कि सरकार ने 31 दिसंबर 2009 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 में संशोधन किया था। इसके तहत आपराधिक मामलों में दोषमुक्ति, कम क्षतिपूर्ति और तय अपराध से छोटे अपराध की सजा देने पर पीड़ित पक्ष को अपील का अधिकार दिया गया था। इससे पूर्व पीड़ित पक्ष केवल रिविजन याचिका ही दायर कर सकता था। ऐसे में खंडपीठ के समक्ष कानूनी बिंदु आया कि यदि अपराध सीआरपीसी में संशोधन से पूर्व हुआ है और निचली अदालत ने फैसला संशोधन लागू होने के बाद दिया है तो ऐसे में संशोधन को कब से लागू माना जाए। इस पर खंडपीठ ने कानूनी बिंदु उठाते हुए इसे तय करने के लिए वृहदपीठ में भेज दिया।
जहां वृहदपीठ ने विवाद को तय करते हुए कहा है कि प्रकरण में दिए गए फैसले के दिन से पीड़ित को अपील का अधिकार तय किया जाए।