जीआरपी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया
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राजस्थान में ट्रेनों में लूटपाट करने वाले गिरोह के शातिर बदमाश लूटे गए मोबाइल फोन साथियों के जरिए आगरा में बिकवाते थे। जीआरपी के हत्थे चढ़े इन तीन बदमाशों ने करीब एक दर्जन से ज्यादा लूटपाट, डकैती की वारदातें करना कबूल की है।
पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह ज्यादातर वारदातें कोटा और सवाईमाधोपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के आउटर पर निकलते वक्त करते है। इसके लिए महिला कोच को निशाना बनाते है। ये बदमाश ट्रेनों में सफर कर रही महिलाओं को पिस्टल व धारदार हथियार दिखाकर यह गिरोह नकदी, मोबाइल फोन व अन्य कीमती वस्तुएं लूटता है और फिर चेन पुलिंग कर ट्रेन की रफ्तार धीमी होने पर भाग जाते है।
31 मई को इस गिरोह ने सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन के पास मुंबई—जयपुर सुपरफास्ट और कोटा—गंगानगर एक्सप्रेस ट्रेन के महिला कोच में घुसकर पिस्टल दिखाकर तीन महिला यात्रियों से नकदी व मोबाइल फोन लूट लिए थे। जीआरपी सवाईमाधोपुर पुलिस ने गांव श्यामपुरा, सवाईमाधोपुर निवासी भानू मीणा व रेलवे कॉलोनी, सवाई माधोपुर निवासी अबरार अहमद को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि वारदात में शामिल दो मुख्य आरोपी रेलवे कॉलोनी, सवाई माधोपुर निवासी वारिश उर्फ भूरिया तथा गांव छारोदा, सवाईमाधोपुर निवासी राजेश मीणा फरार चल रहे है। उनकी तलाश जारी है।
एसपी सुनील विश्नोई ने बताया कि तीनों लुटेरों लूटी गई नकदी को आपस में बांट लेते है, जबकि लूटे गए मोबाइल फोन अपने साथी अबरार अहमद की मदद से आगरा में औनेपौने दामों में बिकवाते थे। इस गिरोह के खुलासे के लिए साइबर एक्सपर्टस की मदद ली। करीब 50 संदिग्ध लोगों को पकड़कर पूछताछ की गई। रेलवे स्टेशन व आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज को खंगाला। तब सवाईमाधोपुर जीआरपी के कांस्टेबल रामप्रसाद को लुटे गए मोबाइल फोन आरोपी अबरार अहमद द्वारा आगरा बेचने जाने की सूचना मिल गई। तब जीआरपी ने अबरार को पकड़कर पूछताछ की तो गिरोह का पर्दाफाश हो गया।