पत्नी को जलाकर मौत के घाट उतारने वाले पति को महिला उत्पीड़न न्यायालय ने दोषी करार दिया। न्यायाधीश नुसरत बानो ने आरोपी पति को आजीवन कारावास और आर्थिक दण्ड की सजा से दंडित करने की सजा सुनाई है।
मामला अजमेर जिले से जुड़ा है। यहां महिला एवं उत्पीड़न न्यायालय के विशिष्ट लोक अभियोजक सीमांत भारद्वाज ने बताया कि 3 नवम्बर 2014 को गेगल थाना क्षेत्र के भवानीखेड़ा गांव में महेन्द्र सिंह रावत की पत्नी कांता रावत को झुलसी अवस्था में जेएलएन अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां कांता ने मरने से पहले मजिस्ट्रेट के सामने पर्चा बयान देकर कहा कि उसके पति महेन्द्र सिंह ने केरोसिन उडेलकर आग लगाई थी। इससे पहले उसके पेट में लात मारी थी जिससे उसका दो माह का गर्भ भी गिर गया था।
भारद्वाज ने बताया कि पर्चा बयान के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन मृतका कांता के मां-बाप व भाई ने भी अदालत में दामाद के खिलाफ बोलने से इनकार कर दिया। इस पर उन्होंने अदालत में 32 गवाह और 42 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए। इसके आधार पर न्यायाधीश नुसरत बानो ने आरोपी महेन्द्र सिंह रावत को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित करने की सजा सुनाई।