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रिश्वतखोर नर्सिंग ट्यूटर और पत्नी, बेटों समेत छह आरोपियों को जेल 

Mon, 21 Aug 2017 07:54 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
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jail - फोटो : Demo pic
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निजी अस्पताल संचालक से पांच लाख रुपए रिश्वत मांगने के जुर्म में पकड़े गए नर्सिंग ट्यूटर, उसकी पत्नी और दो बेटों समेत छह आरोपियों को कोर्ट ने आज जेल भेज दिया। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के केस में चालान पेश किया। तब कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए।
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एसीबी के एडीजी आलोक त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी महेश चंद शर्मा, नर्सिंग ट्यूटर, कॉलेज आॅफ नर्सिंग जयपुर एवं कंसल्टेंट नर्सिंग एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली रहा है।वह विद्यु नगर- ए, क्वींस रोड, वैशाली नगर हाल आरएजी हॉस्पिटल, शिप्रापथ मानसरोवर में रहता है। इसके अलावा जेल भेजे गए अन्य आरोपियों में महेश चंद की पत्नी मीना देवी, बेटा मोहित शर्मा, अंकित शर्मा, 65 वर्षीय सुमेर चंद शर्मा निवासी करौली हाल परसराम कॉलोनी, हिंडौनसिटी तथा राधेश्याम शर्मा निवासी टोडाभीम, करौली का है।

इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने धारा 13 1 ई, 13 2 पीसी एक्ट 1988 एवं आईपीसी 109 आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया था। जिसका अनुसंधान एसीबी के एसपी शरद चौधरी को सौंपा गया था। जिन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार कर आज कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने महेश शर्मा, उसकी पत्नी मीना देवी व दोनों बेटों के अलावा अन्य दोनों रिश्तेदारों को 31 अगस्त तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
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इस तरह चढ़ा था एसीबी के हत्थे

demo pic - फोटो : Demo pic
एसीबी के एडीजी आलोक​ त्रिपाठी ने बताया कि 29 जून 2013 को धनवंतरी इंस्टीट्यूट आॅफ पेरा मेडिकल साइंस जयपुर में संचालित जीएनएम कोर्स को आईएनसी, नई दिल्ली की इंटरनेट सूची में ​शामिल करवाने के लिए अस्पताल संचालक से पांच लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में आरोपी महेशचंद शर्मा तथा दलाल राजेंद्र प्रसाद सैनी को गिरफ्तार किया था। इस पर एसीबी ने 1 जुलाई 2013 को मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान शुरु किया और कोर्ट में आरेापियों के खिलाफ चालान पेश किया था।

एडीजी त्रिपाठी ने बताया कि महेश चंद शर्मा को ट्रेप के दौरान उसके मकान व बैंक लॉकर की तलाशी ली गई।​ जिसमें कई बेनामी संपत्ति व प्रोपर्टी इत्यादि से संबंधित दस्तावेज बरामद ​हुए थे। जिसका एसीबी ने 3 सितंबर 2013 को मुकदमा दर्ज किया और इसका अनुसंधान एसपी शरद चौधरी को सौंपा गया। जिन्होंने 21 अगस्त को अनुसंधान पूरा कर आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। 
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