हिंगोनिया गौशाला मामले में जज महेशचंद शर्मा के खिलाफ समाचार चैनलों के दो पत्रकारों द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर निचली अदालत में परिवाद पेश किया गया है।
परिवादी एडवोकेट सीसी रत्नू ने अपने परिवाद में महानगर मजिस्ट्रेट क्रम 17 को बताया कि दो प्रतिष्ठित न्यूज चैनलों के वरिष्ठ पत्रकारों ने हाईकोर्ट के जजों को ट्रेनिंग पर चिड़ियाघर ले जाने का बयान दिया तो वहीं एक पत्रकार ने न्यायाधीश महेशचंद शर्मा को काऊ जज और पीकॉक जज तक कह डाला। परिवादी ने ये भी कहा है कि जजों की नियुक्ति को लेकर किसी को भी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं हे। इस मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में अब 6 जून को फैसला होगा।
गौरतलब है कि बहुचर्चित हिंगोनिया गौशाला मामले में गत 31 मई को हुई सुनवाई में फैसला करने वाले जज महेशचंद शर्मा ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने का सुझाव केंद्र सरकार को दिया था। शर्मा ने अपने इस सुझाव के पीछे तर्क देते हुए मोर का उदाहरण दिया जिसमें उन्होनें कहा कि 'जो मोर है, वो आजीवन ब्रह्मचारी है। वह कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता। इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है। मोर या मोरनी को जन्म देती है।'
उन्होंने कहा 'गाय के अंदर कई सारे गुण हैं जिनको देखते हुए राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।' शर्मा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनका काफी मजाक उड़ाया गया और न्यूज चैनलों पर भी इस मुद्दे पर दिनभर बहस छिड़ी रही।