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लिव इनः चाकू पर खरबूजा या खरबूजे पर चाकू, नुकसान एक ही का!

Mon, 14 Aug 2017 07:21 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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live in relationship
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महिला आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप बिलकुल उस तरह है, जैसे चाकू पर खरबूजा गिरे या खरबूजे पर चाकू, नुकसान एक ही का होना है। लिव इन रिलेशनशिप में नुकसान हमेशा महिला का ही होता है। बेहतर होगा कि लड़कियां शादी के बाद ही लड़कों के साथ रहें।
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राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वे लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ नहीं है। भारत को आजादी से रहने का हक है, लेकिन उन्हें लिव इन रिलेशनशिप के आ रहे बुरे परिणाम की चिंता रहती है। नुकसान हमेशा महिलाओं को ही होते हुए देखा गया है। लड़कियों को न तो सम्पत्ति में हक मिलता है और कानूनी मान्यता नहीं होने के कारण लड़के पर किसी तरह का दबाव भी नहीं बन पाता है। शादी के बाद लड़कियों को सभी तरह के अधिकार मिल जाते हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक महिलाएं ही आयोग के पास पीड़ित के रूप में सामने आई हैं, लड़का तो कोई अब तक आया नहीं। इसमें लड़कियां पहले तो साथ अपनी मर्जी से रह लेती हैं, फिर जब धोखा या परेशानी मिलती है, तो वे कानून की मदद लेती हैं। मान्यता नहीं होने व कानून नहीं होने के कारण उन्हें कोई मदद नहीं मिल पाती, फिर वे चाहती हैं कि लड़के के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हो जाए।
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एेसे में देखा जाए तो लिव इन रिलेशनशिप अपराध को बढ़ावा देता है। ये आत्महत्याओं को भी बढ़ावा दे रहा है।

कांग्रेस व एक्टिविस्ट बताएं, लिन इन का कोई आधिकारिक नाम

सुमन शर्मा।
एक पीड़िता के बारे में उन्होंने बताया कि तीन साल रहने के बाद एक लड़की को छोड़कर लड़का अचानक कहीं चला गया। धोखा मिलने पर लड़की आयोग के पास पहुंची। अब हम भी उसकी कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं।

सुमन शर्मा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस और एक्टिविस्ट ये बताएं कि लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों के रिश्ते का कोई अाधिकारिक नाम है क्या? इन रिश्तों का कोई रजिस्ट्रेशन, कोई बॉन्ड होते हुए देखा है क्या?

उन्होंने कहा कि जब मैं लिव इन रिलेशनशिप के बुरे परिणामों के बारे में बात करते हुए इसका विरोध करती हूं, तो कांग्रेस व एक्टिविस्ट आरोप  लगाते हैं कि मैं आरएसएस या बीजेपी का एंजेंडा लागू करने का प्रयास कर रही हूं। लेकिन ये लोग किसी लिव इन रिलेशनशिप से पीड़ित महिला की मदद के लिए आगे आए क्या कभी।
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आयोग के सामने आ चुकी हैं अब तक इतनी लड़कियां

सुमन शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
महिला आयोग के सामने अब तक लिव इन रिलेशनशिप से पीड़ित बीस महिलाएं आ चुकी हैं। इनमें अधिकतर अच्छी पढ़ी लिखी प्रोफेशनल लड़कियां है, जो कॉरपोरेट्स व एमएनसीज आदि में काम कर रही हैं। वहीं इससे कहीं ज्यादा संख्या उनकी है जो पीड़ित होते हुए भी सामने नहीं आतीं।

सुमन शर्मा ने कहा कि जो पीड़िताएं सामने आती हैं उनकी मैं या आयोग कोई मदद लीगली नहीं कर पाते। लिव इन रिलेशनशिप के लिए कोई कानून बना हुआ ही नहीं है। इस कारण ना तो थाने में एफआईआर होती हैं ना अदालत में ऐसी सुनवाई हो पाती है।

उनका कहना है कि आयोग लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ महिलाओं में जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसमें बताया जाता है कि ये हमारी संस्कृति के मुताबिक नहीं है। महिलाओं को चाहिए कि वे लिव इन में रहने की बजाय शादी करें।
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