भंवरी देवी सितंबर 2011 में लापता हो गई थी। पति अमरचंद ने आरोप लगाया कि जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा के इशारे पर भंवरी का अपहरण किया गया है। हालांकि बाद में अमरचंद भी इस मामले में लिप्त पाया गया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि बोरुंदा निवासी भंवरी देवी एक सितंबर 2011 को दोपहर एक बजे अपने घर से रवाना हुई। वह सोहनलाल विश्नोई से कार सौदे के पैसे लेने जा रही थी। करीब चार बजे सोहनलाल ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और कई घंटे एक से दूसरे स्थान पर घुमाता रहा।
कार में शहाबुद्दीन व कुंभाराम उर्फ बलदेव भी मौजूद थे। सोहनलाल जयपुर में महिपाल मदेरणा के मकान के आसपास मंडरा रहे सहीराम व उमेशाराम से भी बात करता रहा। दरअसल सहीराम ने भंवरी को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी विशनाराम विश्नोई व उसकी गैंग को सौंप रखी थी। इनका काम भंवरी को विशनाराम को सौंपना था, लेकिन कार में शहाबुद्दीन के मौजूद रहने के कारण विशनाराम, भंवरी को नहीं लेना चाहता था। ऐसे में विशनाराम को मनाने में समय निकलता चला गया। इस बीच भंवरी के दबाव देने पर ये लोग बोरुंदा रवाना हो गए।
बोरुंदा पहुंचने से पहले विशनाराम भंवरी को ले जाने के लिए तैयार हो गया। उसी समय बलदेव ने गाड़ी को घुमाया तो भंवरी को शक हो गया और उसने चलती गाड़ी का दरवाजा खोल नीचे कूदने की कोशिश की। यह देख सोहनलाल व शहाबुद्दीन ने उसे आगे की सीट की तरफ खींचा। दोनों ने भंवरी का सिर व गर्दन सीटों के बीच में दबा दिया। दम घुटने भंवरी निढाल हो गई। उसके मरते ही गाड़ी में सवार तीनों लोगों के हाथ-पैर फूल गए। थोड़ी देर में ये जालोड़ा क्षेत्र में पहंचे और विशनाराम से मिले।
भंवरी को मरा देख विशनाराम ने शव लेने से मना कर दिया। सहीराम ने अपने फोन से ही विशनाराम की महिपाल मदेरणा से बात कराई। महिपाल ने विशनाराम से शव ठिकाने लगाने में मदद मांगी और उसे हरसंभव सहयोग का भरोसा दिाया। इस पर रात करीब 9 बजे विशनाराम ने भंवरी के शव को अपनी गाड़ी में रखवाया और अज्ञात स्थान पर ले जाकर जलाने के बाद नहर में फेंक दिया। इस दौरान उसके साथ अशोक, कैलाश व ओमप्रकाश भी थे।
सीबीआई ने नहर की तलाशी करवाई तो अस्थियां विसर्जित करने वाला बोरा एक जगह अटका मिल गया। इसमें कुछ ही अस्थियां बची थीं। जांच के लिए सीबीआई ने भंवरी के बेटे व बेटी के डीएनए के साथ भंवरी की अस्थियों को अमेरिका में एफबीआई के पास भेजा। एफबीआई ने जांच के बाद पुष्टि कर दी कि ये अस्थियां भंवरी की ही हैं। इससे स्पष्ट हो गया कि भंवरी अब जिंदा नहीं है।
सीबीआई ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए जांच शुरू की तो कई नाम सामने आए, लेकिन चुनिंदा लोगों पर ही ध्यान केंद्रित किया। आखिरकार सहीराम, उमेशाराम, महिपाल मदेरणा, विशनाराम, सोहनलाल, मलखान सिंह विश्नोई, उसका भाई परसराम और भंवरी के पति अमरचंद सहित 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। सबसे अंत में इंद्रा विश्नोई पुलिस के हत्थे चढ़ी।
अपहरण व हत्या की साजिश: सीडी कांड के बाद महिपाल मदेरणा, मलखान सिंह, परसराम विश्नोई, इंद्रा विश्नोई, भंवरी के पति अमरचंद, सोहनलाल, कुंभाराम, शहाबुद्दीन ने अपहरण व हत्या की साजिश रची। इसका मुख्य सूत्रधार सहीराम था। उमेशाराम ने सहीराम का सहयोग किया था।
लाश ठिकाने लगाने के लिए: विश्नाराम, कैलाश जाखड़, अशोक, ओमप्रकाश ने मिलकर भंवरी के शव को जलाया और उसकी राख को नहर में बहा दिया था।
पैसों का लेनदेन: दिनेश और पुखराज की पैसों के लेनदेन में भूमिका सामने आई। एक आरोपी रेशमाराम भी था, जो इंद्रा का सहयोगी था। उसे पूर्व में जमानत मिल चुकी थी। (इंद्रा को छोड़कर सभी को जमानत मिल चुकी है।)