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भंवरी देवी हत्याकांडः सिनेमा, सियासत और साजिश की पूरी कहानी, जानें कब, कैसे और क्यों हुआ?

Thu, 26 Aug 2021 05:48 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

  • प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाला भंवरी देवी अपहरण और हत्याकांड फिर सुर्खियों में है।
  • हाईकोर्ट ने एक दशक से जेल में बंद आरोपियों में शामिल भंवरी के पति अमरचंद व पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा समेत 7 लोगों को मंगलवार को जमानत दे दी थी।
  • अब  मलखान की बहन इंद्रा विश्नोई को छोड़कर 16 आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। 
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भंवरी देवी और महिपाल मदेरणा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाला भंवरी देवी अपहरण और हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। इस मामले में हाईकोर्ट ने एक दशक से जेल में बंद आरोपियों में शामिल भंवरी के पति अमरचंद व पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा समेत सात लोगों को मंगलवार (24 अगस्त) को जमानत दे दी थी। तत्कालीन विधायक मलखान सिंह और महिपाल मदेरणा समेत कुल 17 आरोपी इस प्रकरण में जेल में थे। अब तक मलखान की बहन इंद्रा विश्नोई को छोड़कर 16 आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। 

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जोधपुर के जलीवाड़ा गांव के एक उपकेंद्र में सहायक नर्स के पद पर तैनात भंवरी देवी साधारण परिवार से थी, लेकिन राजस्थानी फिल्मों में नाम कमाने की महत्वाकांक्षा के चलते ड्यूटी छोड़कर शूटिंग पर चली जाती थी। ड्यूटी से गायब रहने पर उसे सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन मलखान सिंह व मंत्री महिपाल मदेरणा की मदद से उसने निलंबन को रद्द करवा लिया। इसके बाद से तीनों के बीच नजदीकियां शुरू हों गईं। दोनों नेताओं से नजदीकियों के चलते भंवरी पर ग्लैमर से ज्यादा राजनीति का नशा चढ़ने लगा था।

चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देने पर वह दोनों को धमकाने लगी थी। मुश्किलें बढ़ती देख मलखान सिंह और महिपाल मदेरणा ने उससे दूरी बना ली। इस बीच एक सीडी वायरल हुई, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया। इसी सीडी के दम पर भंवरी तीन दिन में सरकार गिराने का दावा करती थी। इसी कारण मलखान व महिपाल से उसकी दुश्मनी बढ़ गई और फिर उसका अपहरण कर हत्या कर दी गई। भंवरी के साथ मदेरणा की सीडी सार्वजनिक हुई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मदेरणा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। 
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यूं रची थी साजिश

भंवरी देवी सितंबर 2011 में लापता हो गई थी। पति अमरचंद ने आरोप लगाया कि जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा के इशारे पर भंवरी का अपहरण किया गया है। हालांकि बाद में अमरचंद भी इस मामले में लिप्त पाया गया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि बोरुंदा निवासी भंवरी देवी एक सितंबर 2011 को दोपहर एक बजे अपने घर से रवाना हुई। वह सोहनलाल विश्नोई से कार सौदे के पैसे लेने जा रही थी। करीब चार बजे सोहनलाल ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और कई घंटे एक से दूसरे स्थान पर घुमाता रहा।

कार में शहाबुद्दीन व कुंभाराम उर्फ बलदेव भी मौजूद थे। सोहनलाल जयपुर में महिपाल मदेरणा के मकान के आसपास मंडरा रहे सहीराम व उमेशाराम से भी बात करता रहा। दरअसल सहीराम ने भंवरी को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी विशनाराम विश्नोई व उसकी गैंग को सौंप रखी थी। इनका काम भंवरी को विशनाराम को सौंपना था, लेकिन कार में शहाबुद्दीन के मौजूद रहने के कारण विशनाराम, भंवरी को नहीं लेना चाहता था। ऐसे में विशनाराम को मनाने में समय निकलता चला गया। इस बीच भंवरी के दबाव देने पर ये लोग बोरुंदा रवाना हो गए।

 

सीट के बीच दबा दिए थे गर्दन और सिर

बोरुंदा पहुंचने से पहले विशनाराम भंवरी को ले जाने के लिए तैयार हो गया। उसी समय बलदेव ने गाड़ी को घुमाया तो भंवरी को शक हो गया और उसने चलती गाड़ी का दरवाजा खोल नीचे कूदने की कोशिश की। यह देख सोहनलाल व शहाबुद्दीन ने उसे आगे की सीट की तरफ खींचा। दोनों ने भंवरी का सिर व गर्दन सीटों के बीच में दबा दिया। दम घुटने भंवरी निढाल हो गई। उसके मरते ही गाड़ी में सवार तीनों लोगों के हाथ-पैर फूल गए। थोड़ी देर में ये जालोड़ा क्षेत्र में पहंचे और विशनाराम से मिले।

भंवरी को मरा देख विशनाराम ने शव लेने से मना कर दिया। सहीराम ने अपने फोन से ही विशनाराम की महिपाल मदेरणा से बात कराई। महिपाल ने विशनाराम से शव ठिकाने लगाने में मदद मांगी और उसे हरसंभव सहयोग का भरोसा दिाया। इस पर रात करीब 9 बजे विशनाराम ने भंवरी के शव को अपनी गाड़ी में रखवाया और अज्ञात स्थान पर ले जाकर जलाने के बाद नहर में फेंक दिया। इस दौरान उसके साथ अशोक, कैलाश व ओमप्रकाश भी थे।

 

एफबीआई ने पुष्टि की अस्थियां भंवरी की ही है

सीबीआई ने नहर की तलाशी करवाई तो अस्थियां विसर्जित करने वाला बोरा एक जगह अटका मिल गया। इसमें कुछ ही अस्थियां बची थीं। जांच के लिए सीबीआई ने भंवरी के बेटे व बेटी के डीएनए के साथ भंवरी की अस्थियों को अमेरिका में एफबीआई के पास भेजा। एफबीआई ने जांच के बाद पुष्टि कर दी कि ये अस्थियां भंवरी की ही हैं। इससे स्पष्ट हो गया कि भंवरी अब जिंदा नहीं है। 

 

यूं खुलता गया राज

सीबीआई ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए जांच शुरू की तो कई नाम सामने आए, लेकिन चुनिंदा लोगों पर ही ध्यान केंद्रित किया। आखिरकार सहीराम, उमेशाराम, महिपाल मदेरणा, विशनाराम, सोहनलाल, मलखान सिंह विश्नोई, उसका भाई परसराम और भंवरी के पति अमरचंद सहित 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। सबसे अंत में इंद्रा विश्नोई पुलिस के हत्थे चढ़ी। 
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हत्या, शव जलाने और ठिकाने लगाने के आरोपी

अपहरण व हत्या की साजिश: सीडी कांड के बाद महिपाल मदेरणा, मलखान सिंह, परसराम विश्नोई, इंद्रा विश्नोई, भंवरी के पति अमरचंद, सोहनलाल, कुंभाराम, शहाबुद्दीन ने अपहरण व हत्या की साजिश रची। इसका मुख्य सूत्रधार सहीराम था। उमेशाराम ने सहीराम का सहयोग किया था।

लाश ठिकाने लगाने के लिए:  विश्नाराम, कैलाश जाखड़, अशोक, ओमप्रकाश ने मिलकर भंवरी के शव को जलाया और उसकी राख को नहर में बहा दिया था।

पैसों का लेनदेन: दिनेश और पुखराज की पैसों के लेनदेन में भूमिका सामने आई। एक आरोपी रेशमाराम भी था, जो इंद्रा का सहयोगी था। उसे पूर्व में जमानत मिल चुकी थी। (इंद्रा को छोड़कर सभी को जमानत मिल चुकी है।)
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