सौ करोड़ की सम्पत्ति और तीन साल की बेटी को छोड़ दीक्षा लेने जा रहे दम्पति के मामले में नया मोड़ आ गया है।
बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के नीमच जिले के निवासी सुमित सिंह राठौड़ और उसकी पत्नी अनामिका की दीक्षा के मामले में संतों से अनुमति नहीं मिल पाई है। इस दम्पति की तीन साल की बच्ची भी है। सम्पत्ति और बच्ची को छोड़कर दीक्षा लेने जा रहे राठौड़ दम्पति में से सिर्फ सुमित राठौड़ ही दीक्षा ले पाएंगें।
जानकारी के अनुसार अनामिका को संत आचार्य रामलाल ने दीक्षा की अनुमति नहीं दी है। 100 करोड़ की संपत्ति के साथ 3 साल की बेटी को छोड़कर सुमित और अनामिका ने संयम पथ पर जाने का फैसला लिया था। 23 सितंबर को सूरत में राठौ[ड़ दपंत्ति की दीक्षा होनी थी। इसी बीच अनामिका की दीक्षा नहीं होने की चर्चा है।
अंतिम फैसला 23 को
फाइल फोटो।
गौरतलब है कि 22 अगस्त को आचार्य के सामने सुमित राठौड़ ने दीक्षा लेने की घोषणा की थी। बाद में अनामिका ने भी पति के नक्शे कदम पर चलने का फैसला किया था। दंपति के इस फैसले से परिवार कुछ लोगों के साथ शहर में विरोध की प्रतिक्रिया आई थी। वॉट्सऐप और फेसबुक पर लगातार बेटी इभ्या को छोड़कर दीक्षा लेने के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे थे।
सोमवार को चर्चा चली कि आचार्य ने अनामिका को दीक्षा लेने की अनुमति नहीं दी है। सवालों और चर्चाओं के बीच राठौर दंपति दीक्षा लेने सूरत रवाना हो गए। परिवार के लोगों का कहना है अनामिका को दीक्षा की अनुमति नहीं मिलने की चर्चा है, लेकिन अभी कुछ साफ नहीं है। दीक्षा होगी या नहीं इसका फैसला 23 सितंबर को सूरत में दीक्षा महोत्सव के दौरान होगा।
चार साल पहले हुई थी शादी
ये लेटर चले सोशल साइट्स पर
- फोटो : अमर उजाला
सुमित की पत्नी अनामिका का पीहर चित्तौड़गढ़ में है। ससुर अशोक चंडालिया बीजेपी के नेता हैं। सुमित से उनकी शादी 4 साल पहले हुई। अनामिका आठवीं बोर्ड में जिले की पहली गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए राजस्थान बोर्ड की 10वीं क्लास में 18वीं और 12वीं में 28वीं रैंक हासिल की। इसके बाद मोदी इंजीनियरिंग कॉलेज लक्ष्मणगढ़ (सीकर) से बीई किया। हिंदुस्तान जिंक में भर्ती निकली। मेरिट में 23 हजार कैंडिडेट्स में अनामिका 17वें नंबर पर रहीं।
उन्होंने करीब 10 लाख के सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की, लेकिन 2012 में सगाई के बाद जॉब छोड़ दी। वहीं सुमित राठौड़ लंदन से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में डिप्लोमा कर चुके हैं। दो साल लंदन में जॉब करने के बाद दादा नाहरसिंह राठौड़ के कहने पर नीमच आ गए। जहां उनकी करीब 10 करोड़ की फैक्ट्री में 100 लोग काम करते हैं। इंफोसिस में इंजीनियर बड़े भाई भी नौकरी छोड़कर इसी बिजनेस से जुड़ गए हैं। इनका एक्सपोर्ट कारोबार भी है।