अजमेर ब्लास्ट मामले में आरएसएस के इंद्रेश कुमार व साध्वी प्रज्ञा सिंह को लेकर एनआईए द्वारा तीन अप्रैल को पेश की गई अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) पर एनआईए की विशेष अदालत का फैसला 11 मई को आएगा।
दरअसल सोमवार को इस रिपोर्ट पर फैसला आना था, लेकिन जज दिनेश गुप्ता के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। साथ ही, अजमेर दरगाह के सैयद सरवर चिश्ती भी अदालत में नहीं पहुंचे। अदालत ने पिछली सुनाई में चिश्ती को व्यक्तगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। अदालत यदि एनआईए की इस रिपोर्ट को मान लेती है, तो इंद्रेश व साध्वी प्रज्ञा को क्लीनचिट मिल सकती है। जिसमें सबूतों के अभाव में आरआरएस नेता इंद्रेश कुमार और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीनचिट दी गई है।
गौरतलब है कि मार्च को एनआईए ने जयपुर की विशेष एनआईए कोर्ट से इंद्रेश, साध्वी प्रज्ञा व अन्य दो व्यक्तियों के सबंध में फाइनल रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय की मांग की थी। जिसके बाद एनआईए को कोर्ट ने तीन अप्रेल तक का समय दिया था।
बता दें कि इसी मामले में अदालत ने पिछले महीने स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया था और भावेश पटेल व देवेंद्र गुप्ता उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इधर, मामले के फरार अभियुक्तों को लेकर अदालत ने केरल के मुख्य सचिव व इंदौर कलक्टर को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए?
अदालत ने इस मामले की पहले हुई सुनवाइयों में फरार चल रहे संदीप, सुरेश व राम चंद्र के केरल व इंदौर निवासी होने के कारण केरल और इंदौर से संबंधितों का विवरण मांगा था। ये विवरण न तो केरल से आया और न ही इंदौर से। अदालत ने नोटिस जारी कर प्रगति रिपोर्ट भी पेश करने को भी कहा।
जानकारी के अनुसार एनआईए की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में गया गया है कि आरएसएस के इंद्रेश कुमार, साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित चार लोगों के खिलाफ अजमेर बम ब्लास्ट मामले में किसी तरह के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।
एनआईए ने पूर्व में भी इंद्रेश, साध्वी प्रज्ञा सहित चार जनों को लेकर क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी, लेकिन अदालत ने इस रिपोर्ट को विध सम्मत नहीं माना था। पूर्व में एनआईए ने रिपोर्ट पेश करने को लेकर कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई थी। इस कारण अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट वापस पेश करने के लिए कहा था।
अजमेर बम ब्लास्ट मामले में आरोप था कि कि इन्द्रेश कुमार ने जयपुर स्थित गुजराती समाज के गेस्ट हाउस में 31 अक्टूबर 2005 को हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। आरोप के तहत बैठक में तय किया कि हिंदू धर्मस्थलों पर हमले हुए, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।