विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के साथ बीते टी साल से देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में आए दिल के मरीजों में उनके दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानकारियां हासिल की गई। इंडियन हार्ट एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टर अभिनव घोष कहते हैं कि उनके पास बीते तीन सालों में अलग-अलग संस्थानों में आए मरीजों में जो पहली बार दिल के मरीज पता चले उसमें पचास फीसदी से ज्यादा ऐसे लोग थे जिनको चलने में असहजता महसूस हो रही थी। लोगों का जब चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। पता चला कि इनमें से अधिकतर ऐसे लोग थे जिनको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बनी हुई थी। लेकिन ऐसे मरीजों ने कभी भी अपना बीपी नहीं चेक किया था। समस्या बढ़ने पर समस्याएं होने लगी।
इंडियन हार्ट एसोसिएशन के सदस्य और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में हृदय रोग विभाग के पूर्व हेड प्रोफेसर आरके सरन कहते हैं कि दिल का हाल आपकी चाल खुद बता देती है। वह कहते हैं इसके लिए बस महज तेज कदमों से कुछ मिनट की वॉक करने की जरूरत है। डॉक्टर सरन कहते हैं कि आप लगातार वॉक करते हैं और फिर चलते हुए अचानक आपको सीने में दर्द या असहजता महसूस होती है तो यह लक्षण आपके दिल के कमजोर होने के हो सकते हैं। तीन मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज कदमों से चलना) में यह लक्षण आपको दिख जाएंगे। डॉ सरन कहते हैं कि जो लोग वॉक नहीं करते हैं उनके लिए तो यह पैरामीटर शुरुआती दौर में मायने नहीं रखता है। कम चलने वाले ब्रिस्क वॉक करने पर तो वैसे ही थक जाते हैं। फिर भी अगर कोई तेज कदम चलने पर छाती में सहजता महसूस करता है तो उसको अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
दिल्ली एनसीआर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर पंकज कहते हैं कि यह सही है कि आपकी तेज कदमों की चाल न सिर्फ आपके दिल को सुरक्षित रखती है बल्कि जरा भी गड़बड़ होने पर आपको इशारे भी कर देती है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति चलते समय सांस लेने में दिक्कत महसूस करें या सीने में दर्द हो तो या इशारे होते हैं कि आपको अपने चिकित्सक के पास जरूर जाना चाहिए। हालांकि उनका कहना है कि जो लोग नियमित रूप से वॉक नहीं करते हैं उनके लिए शुरुआती दिनों में सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन जो नियमित रूप से वॉक करते हैं अगर उनमें भी है समस्या बनी हुई है तो इसको गंभीरता से जरूर लेना चाहिए। डॉ पंकज कहते हैं कि दिल की बीमारियों के बहुत से कारण होते हैं। शारीरिक रूप से काम न करने वाले और अधिक मोटापे के चलते लोगों में दिल की बीमारी बढ़ रही है।
इस स्टडी में शामिल नारायण हृदयालय के पूर्व कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर रत्नाकर शेखर कहते हैं अगर शुरुआती दौर में दिल की बीमारी का पता चल जाए तो इसको आगे बढ़ने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है। उनका कहना है कि तीन साल तक देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में दिल के पहुंचे मरीजों से मिली जानकारी से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि शुरुआती दौर में इग्नोर किए जाने वाले लक्षणों के चलते ही उनकी बीमारियों को दूर करने के लिए चिकित्सकों के पास लंबे इलाज के लिए पहुंचना पड़ा। अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचान लिया जाता प्राथमिक उपचार जो की शारीरिक तौर पर फिट रहने से ही होता है उसको शुरू करने से गंभीर बीमारियों तक पहुंचने में बचाव हो सकता था।