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बड़बोले बाबा: रामदेव के 'बवाली बयान' पड़ते रहे हैं उन्हीं पर भारी, विवादित बोलों के चलते दर्ज हो चुके हैं कई मुकदमे

Mon, 24 May 2021 02:41 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कभी कांग्रेसियों को कहा समलैंगिक तो कभी कहा पद्म पुरस्कारों के लिए लॉबिंग होती है। डॉक्टरों को टर...टर...बोल कर उड़ाया मजाक तो अब कहा एलोपैथी ने ले ली जान...
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कोरोनिल लॉन्च करते बाबा रामदेव - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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बाबा रामदेव और उनके साथ जुड़े विवादों का चोली दामन का साथ है। रामदेव कब कहां क्या बोल दें और उसके बाद किस तरीके का विवाद खड़ा हो जाए इसे लेकर हमेशा संशय बना ही रहता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि बाबा रामदेव ने एलोपैथी को निशाने पर लिया है। इससे पहले भी बाबा एलोपैथिक डॉक्टरों और राजनैतिक पार्टियों से लेकर अमूमन कई मामलों में विवादित बयान देते ही रहे हैं और अकसर विवादों में बने रहते हैं।

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एलोपैथी ‘मूर्खतापूर्ण विज्ञान’

बाबा रामदेव ने तीन दिन पहले यह कह कर पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया कि एलोपैथी ‘मूर्खतापूर्ण विज्ञान’ है। यही नहीं बाबा रामदेव ने यहां तक कह डाला कि एलोपैथी दवाएं लेने के बाद लाखों की संख्या में मरीजों की मौत हुई है। बाबा रामदेव का एलोपैथी को निशाने पर लेने का मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा। एक योग शिविर में रामदेव ने एक युवक से हुई बातचीत का हवाला देते हुए डॉक्टर को टर...टर...कहते हुए तंज कसा। इसके पहले भी बाबा रामदेव ने जब कोरोना की दवा बताकर आयुर्वेदिक प्रोडक्ट लांच किया तब भी बाबा रामदेव के निशाने पर एलोपैथ डॉक्टर ही थे। बाबा रामदेव तब और विवादों में घिर गए जब अपनी लांच करने वाली दवा को उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अप्रूव बताया और बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उनके इस बयान का पूरी तरीके से खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी किसी भी दवा का न कोई अप्रूवल दिया है और न ही कोई सहमति दी है। खास बात यह रही कि इस दवा की लॉन्चिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन समेत कई अन्य मंत्री और बड़े ओहदेदार भी शामिल थे।

'टोपी पहनने वाले भारत माता की जय नहीं बोलते'

रामदेव के निशाने पर सिर्फ एलोपैथिक डॉक्टर ही नहीं राजनैतिक लोग भी रहे। 2013 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि ज्यादातर कांग्रेस के लोग समलैंगिक हैं। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस ने जबरदस्त तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के साथ-साथ कुछ जगहों पर बाबा के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया। बाबा रामदेव ने इस दौरान यह भी कहा समलैंगिकता एक बीमारी है और इस बीमारी का उनके पास बेहतरीन इलाज भी है। बाबा के विवादित बयान यहीं नहीं थमे। कुछ साल पहले रोहतक में आयोजित सद्भावना सम्मेलन में बाबा रामदेव ने यह कहकर बवाल मचा दिया की टोपी पहनने वाले लोग भारत माता की जय नहीं बोलते हैं। उन्होंने कहा उनके हाथ कानून से बंधे हैं नहीं तो ऐसे लाखों लोगों के सिर काटने की हिम्मत रखते हैं। रोहतक की सद्भावना रैली में रामदेव के इस बयान को लेकर देशभर में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। बाबा रामदेव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। कोर्ट कचहरी तक के चक्कर लगाने पड़े।

पेरियार और अंबेडकर के अनुयायियों पर तंज कसा

बाबा रामदेव जिस योग शिविर में पहुंचते हैं अमूमन वहां कुछ ना कुछ ऐसा बोल देते हैं जो विवादों के दायरे में आ जाता है। 2019 में बाबा रामदेव ने पेरियार और अंबेडकर के अनुयायियों पर तंज कस दिया था। बाद में दोनों अनुयायियों ने बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया और देशभर में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। बाबा रामदेव ने हरिद्वार कुंभ में कहा कि उनके जैसे कुवारों को विशेष सम्मान दिया जाए। रामदेव ने इस दौरान कहा दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए। इसके बाद उन्होंने जो विवादित बयान दिया, उसे लेकर एक विशेष जाति समुदाय में जबरदस्त प्रतिक्रिया व्यक्त हुई। बाबा रामदेव ने कहा जिनके 8-10 बच्चे हैं वह कुछ उनको भी दे दें। नतीजा हुआ कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बाबा रामदेव के प्रोडक्ट के विरोध में लोग आने लगे और सोशल मीडिया पर उनके प्रोडक्ट के बॉयकाट को लेकर ट्रेंड शुरू हो गए।

राहुल गांधी पर भी की थी टिप्पणी

बाबा रामदेव के विवादित बयान देशभर में अकसर चर्चा का विषय रहते हैं। खासकर कांग्रेस को निशाने पर रखने वाले बाबा रामदेव एक बार फिर विवादों में आ गए। बाबा रामदेव ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी। इसका नतीजा हुआ कांग्रेसियों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। सन 2014 में बाबा रामदेव ने कहा, राहुल गांधी को लड़की नहीं मिल रही है इसीलिए शादी नहीं हो पा रही है। बाबा रामदेव ने इंडियन और विदेशी लड़कियों की पूरी विस्तार से जानकारी देते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच होने वाले मनगढ़ंत बयानों को भी मंच से साझा किया। रामदेव ने अपने विवादित बयान में यह तक कह दिया कि राहुल गांधी हनीमून मनाने के लिए बाहर जाते हैं। बस फिर क्या था। कांग्रेसियों का खून खौल गया और कई जगह बाबा रामदेव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया और विरोध प्रदर्शन समेत उनके पुतले फूंके जाने लगे।

शंकराचार्य की मूर्ति का करना पड़ा था माल्यार्पण

बाबा रामदेव ने एक बार देश में दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों को भी निशाने पर ले लिया। बाबा रामदेव ने कहा कि देश में दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारो के लिए पूरी लॉबिंग होती है। उसी के माध्यम से ये पुरस्कार दिए जाते हैं। उनके इस बयान को लेकर पूरे देश में जबरदस्त तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। जबकि कई नामचीन लोगों ने बाबा रामदेव के इस बयान का खंडन करते हुए कहा जिन लोगों को पद्म पुरस्कार मिलता है यह उनकी तौहीन है। रामदेव को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

इसी तरह बाबा रामदेव ने एक बार आदि शंकराचार्य के दर्शन 'ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या' को चुनौती देते हुए उसे लोगों को निकम्मा और कामचोर बनाने के लिए ज़िम्मेदार बताया था। इसके बाद देशभर में साधुओं ने रामदेव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए और पुतले फूंके। बाद में उन्हें हरिद्वार में संतसभा में इसके लिए लिखित माफी मांगनी पड़ी और आर्यसमाजी होने के बावजूद शंकराचार्य की मूर्ति को माल्यार्पण करना पड़ा। तब जाकर ये विवाद शांत हुआ।
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दलितों को लेकर बोले बोल

बाबा रामदेव इतने ज्यादा विवादित बयान देते हैं कि एक बार बहुजन समाज पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि बाबा रामदेव का सिर काट कर लाने वाले को एक करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। दरअसल ऐसा कहने के पीछे बाबा रामदेव का वह बयान था जिसे लेकर पूरे देश के दलित समुदाय में गुस्सा था। हुआ यह कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी दलितों के घर जा रहे थे। बाबा रामदेव ने दलितों के घर जाने वाले राहुल गांधी को लेकर टिप्पणी की और कहा कि राहुल गांधी दलितों के घर हनीमून मनाने जाते हैं। बस फिर क्या था। पूरे देश में दलित समुदाय आंदोलित हो उठा पूरा ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि बहुजन समाज से जुड़े लोगों ने उनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया। कई जगहों पर बाबा रामदेव के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए।

आयुर्वेदिक शिक्षक महासंघ नाराज

बाबा के विवादित बयानों को लेकर अखिल भारतीय आयुर्वेदिक शिक्षक महासंघ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक योग गुरु मंगेश त्रिवेदी कहते हैं कि हमें किसी भी चिकित्सा पद्धति को गलत कहने का अधिकार नहीं है। एलोपैथ तो मॉडर्न साइंस हैं और विज्ञान हमारे जीवन का आधार है। मोदी सरकार को हमें धन्यवाद देना चाहिए कि उनके प्रयासों से पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को अपनाया जा रहा है। योग को पूरी दुनिया अपना रही है। ऐसे दौर में जब हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति को पूरी दुनिया अपना रही है तो हमें पूरी दुनिया में लागू मॉडर्न साइंस की चिकित्सा पद्धति को नकारने का कोई हक नहीं बनता है। हमें उनके साथ मिलकर लोगों के बेहतर जीवन को सुगम बनाने का प्रयास करना चाहिए। अखिल भारतीय आयुर्वेदिक शिक्षक महासंघ का कहना है कि सभी प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का हमें सम्मान करना चाहिए ताकि हम सब मिलकर कोरोना जैसी महामारी में लोगों का जीवन बचा सके।
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