बमबारी से बना तालाब
बतौर कमलेश सिंह, फैक्ट्री में चारों तरफ लाइटें लगी हुई थीं। इससे जापानी हवाई जहाजों के पायलटों को पक्का यकीन हो गया कि ये वही रेलवे स्टेशन है। उन्होंने वहीं पर बमबारी कर दी। ये सब बातें रिपोर्ट हुई हैं। हालांकि कारखाना उस बमबारी में बच गया। बम के टुकड़े पड़े हुए थे, जिन्हें बहुत दिनों बाद कबाड़ में बेच दिया गया। बमबारी में बंगला भी सुरक्षित बच गया। बाद में जब एयरफोर्स ने सर्वे किया तो उन्होंने मालूम हुआ कि रेलवे स्टेशन तो सुरक्षित है। उस वक्त डर्बी गार्डन के मैनेजर के पास जिले के सभी चाय बागानों का नियंत्रण होता था, इसलिए उसे 'ग्राउंड टेलीकॉम सर्विस' मुहैया कराई गई थी। उसके द्वारा जापान को संदेश भेजा गया कि आपने बिना किसी वजह के बागानों पर बमबारी कर दी।
घटना के तीसरे दिन जापान के हवाई जहाजों ने कारखाने के ऊपर पैम्फ्लेट बरसाए। इन पर लिखा था कि वे इस घटना के लिए माफी मांगते हैं, खेद जताते हैं। वे पैम्फ्लेट बहुत से लोगों ने पढ़े थे। घटना की रिपोर्टिंग में उनका जिक्र हुआ है। कारखाने पर जो बम गिराए गए थे, वहां पोखर यानी तालाब बन गया था। दो बम कारखाने के निकट रह रहे स्थानीय नागरिक राजेश के घर के पास गिरे थे। वहां दलदल बन गया था। कमलेश सिंह के मुताबिक, ये दोनों स्थल आज भी वैसे ही हैं। उन्हें बहुत से लोग देखने आते हैं। चूंकि ये घटना इतिहास में अपनी खास जगह नहीं बना सकी, इसलिए अधिक लोग इससे अनभिज्ञ हैं।