जलवायु परिवर्तन के कारण दुनियाभर के जल श्रोत बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसी बीच एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि नदियां अपना प्राकृतिक स्वरूप खोती जा रही हैं। सामान्य मार्गों से भटकने के कारण अब वैश्विक जल संसाधन खतरे में हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर 50 प्रतिशत से अधिक जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले साल बदलाव देखा गया।
नदी के प्रवाह की स्थितियों में बड़े बदलाव देखे गए। इस कारण जलवायु परिवर्तन से जूझ रही दुनिया के सामने पानी का गंभीर संकट पैदा होने लगा है। "डब्ल्यूएमओ स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2022 रिपोर्ट" में नदी के बहाव, भूजल, वाष्पीकरण, मिट्टी जैसे कई प्राकृतिकक संसाधनों पर बात की गई है। जलाशयों में नमी और प्रवाह का दीर्घकालिक अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन और हानिकारक मानवीय गतिविधियों के कारण जल विज्ञान चक्र असंतुलित हो रहा है।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण में पैदा हो रहे इस असंतुलन के परिणाम विनाशकारी हैं। सूखे और अत्यधिक वर्षा की घटनाएं जीवन और अर्थव्यवस्था दोनों पर कहर बरपा रही हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के मीठे पानी के संसाधनों की वास्तविक स्थिति के बारे में अभी भी बहुत कम जानकारी है। साल 2022 में, वैश्विक जलग्रहण क्षेत्रों के 50 प्रतिशत से अधिक में सामान्य नदी का प्रवाह नहीं दिखा। प्राकृतिक स्थितियों में बदलाव के सबूत इस बात से मिले कि अधिकांश क्षेत्र सामान्य से अधिक शुष्क रहे, जबकि बेसिन का एक छोटा प्रतिशत सामान्य स्थितियों से ऊपर या बहुत ऊपर रहा, जो 2021 की तरह ही था।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक प्रमुख जलाशयों में (2022 में) कम या सामान्य प्रवाह देखा गया। तेजी से बदलती जलवायु के कारण पानी उपलब्ध कराने में ये एक चुनौती पेश करता है। यूरोप में गर्मियों के दौरान बड़ी गर्मी और सूखे के कारण वाष्पीकरण बढ़ा, मिट्टी की नमी में कमी के साथ-साथ नदी के प्रवाह में भी कमी आई। इससे खेती-किसानी में चुनौतियां पैदा हुईं। यहां तक कि ठंडे पानी की कमी के कारण बिजली संयंत्र भी बंद हो गए।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी- डब्ल्यूएमओ ने कहा कि 2022 में ला नीना का असर भी देखा गया। 2023 में अल नीनो के कारण जल विज्ञान चक्र पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसका विश्लेषण अगले साल की रिपोर्ट में किया जाएगा। बता दें कि दोनों जलवायु पैटर्न हैं जिनका सामान्य अर्थ महासागर के पानी के तापमान में बदलाव होना है।
2022 की गर्मियों में गंभीर सूखे के कारण यूरोप के कई हिस्से प्रभावित हुए। डेन्यूब और राइन जैसी नदियों का पानी तेजी से सूखने लगा। ठंडे पानी की कमी के कारण फ्रांस में परमाणु बिजली उत्पादन बाधित हो गया। उत्तरी अमेरिकी देश में लगातार सूखे के कारण अमेरिका में मिसिसिपी नदी का जल स्तर बेहद कम हो गया।
चीन में यांग्त्ज़ी नदी बेसिन में गंभीर सूखे के कारण नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ। लंबे समय तक सूखे के कारण हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नाइजर बेसिन और दक्षिण अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण 2022 में बड़ी बाढ़ की घटनाएं सामने आईं।
पाकिस्तान में सिंधु नदी बेसिन में आई भीषण बाढ़ से कम से कम 1,700 लोगों की मौत हो गई। 33 मिलियन लोग प्रभावित हुए और अनुमान के मुताबिक 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ।