साक्षरता दर के मामले में भारत की स्थिति पड़ोसी देशों से थोड़ी अच्छी है। भले ही भारत साक्षरता दर के मामले में विकसित देशों की सूची में बहुत पीछे हैं, लेकिन विकासशील देशों की सूची में उसकी स्थिति बेहतर है।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जहां 79% पुरुष 61% महिला और 71% युवा साक्षर हैं, वहीं भारत में इसके मुकाबले पुरुष 88%, महिला 74% और युवा पीढ़ी 81% साक्षर हैं। अगर हम अपने एक और पड़ोसी देश यानि नेपाल की बात करें तो यह मुल्क भारत से बराबरी जरूर कर रहा है। यहां पुरुष 88%, महिलाएं 78% और युवा पीढ़ी 83 % साक्षर है।
वहीं, गरीब देश माने जाने वाला भूटान भी भारत से ज्यादा पीछे नहीं है। यहां 80% पुरुष, 68% महिलाएं और 74% युवा साक्षर हैं। वही, साक्षरता दर के मामले में बांग्लादेश की हालत बहुत अच्छे नहीं है फिर भी वो भारत से बहुत ज्यादा पीछे नही है। यहां पुरुषों की साक्षरता दर 75%, महिलाओं की 78% और युवाओं की 77% है।
एक रिपोर्ट के अनुसार छह करोड़ बच्चे आधारभूत शिक्षा से वंचित हैं। वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भी हर पांच में से एक पुरुष और दो-तिहाई महिलाएं अनपढ़ है। वहीं, दुनियाभर में करीब 75.7 करोड़ लोग आज भी लिखने और पढ़ने में अक्षम हैं।
भारत में इस वर्ष विश्व साक्षरता दिवस की थीम साक्षरता और कौशल विकास रखी गई है। इस लिहाज से इंडिया स्किल्स रिपोर्ट, 2018 बेहद महत्वपूर्ण है, जिसके मुताबिक पिछले पांच साल में भारतीय ग्रेजुएट्स की एम्प्लॉयएबिलिटी (रोजगार क्षमता) 34% से बढ़कर 45.6% हुई है।
यह आंकड़ा देखने में उत्साहजनक लग सकता है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि अभी भी युवाओं की आधी आबादी रोजगार के लिए तैयार नहीं है। इसका अर्थ है कि उनके पास डिग्री तो है, लेकिन काम करने के लिए जरूरी स्किल्स नहीं हैं।