देश की राजधानी दिल्ली में 2016 में मां के दूध का पहला बैंक खोला गया जिसका नाम अमारा रखा गया। यहां महज दो महीनों में ही करीब 80 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क इकट्ठा किया गया। इससे पहले राजस्थान के उदयपुर जिले में 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' की स्थापना की गई थी। इसी तरह दिव्य मदर मिल्क बैंक की तर्ज पर ही जयपुर में ही 'जीवनधारा' नाम का मदर मिल्क बैंक खोला गया है जो राज्य का पहला सरकारी और उत्तर भारत का दूसरा मदर मिल्क बैंक है।
संरक्षण बेहद जटिल
मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल में 1989 में स्थापित किए गए एशिया के सबसे पहले ह्यूमन मिल्क बैंक 'स्नेहा' को अब 'सायन मिल्क बैंक' के नाम से जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि मां का दूध तो शिशु का सर्वोत्तम आहार है ही लेकिन कई बार उच्च रक्तचाप, अधिक रक्तस्राव या तेज बुखार के चलते मां शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं। उस स्थिति में किसी दूसरी मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प होता है, लेकिन यह सीधा शिशु को नहीं दिया जा सकता है।
उससे पहले कुछ सेफ्टी टेस्ट करने पड़ते हैं और सावधानियां भी बरतनी होती हैं। डोनर मदर का स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसी मांओं से इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकाला जाता है, जिसे बैंक में 62.5 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद जांच होती है।
अमेरिका सबसे आगे
- 1569.79 लीटर मिल्क डोनेशन का गिनीज रिकॉर्ड है। अमेरिकी माएं मिल्क डोनेशन में सबसे अव्वल हैं। यह आंकड़ा जनवरी वर्ष 2011 से मार्च 2014 तक का है।
- एशिया का पहला मिल्क बैंक भारत में नवंबर 1989 में मुंबई के लोकमान्य तिलक हॉस्पिटल में खुला था। विश्व का पहला ब्रेस्ट मिल्क बैंक 1911 में विएना में खुला था।
मां का दूध न मिलना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक इन मौतों का मुख्य कारण बच्चों में संक्रमण और उनका औसत से कम वजन का पैदा होना है। ऐसे ही बच्चे बाद में कुपोषण, निमोनिया, डायरिया जैसे रोगों के शिकार हो जाते हैं, जिसके चलते उनकी असमय मौत हो जाती है। इस स्थिति में एक बच्चे के लिए मां का दूध जीवनरक्षक साबित होता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह
स्तनपान के प्रति जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से अगस्त माह के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। स्तनपान सप्ताह के दौरान मां के दूध के महत्त्व की जानकारी दी जाती है। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध अमृत के समान है। मां का दूध शिशुओं को कुपोषण व अतिसार जैसी बीमारियों से बचाता है। स्तनपान को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। शिशुओं को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के लिए महिलाओं को इस सप्ताह के दौरान विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।