अर्थराइटिस और दृष्टिबाधा यह दोनों देश के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हैं। बीते कुछ दशक में दृष्टिबाधा के मामलों में करीब 52 फीसदी कमी आई है, लेकिन इससे कई गुना ज्यादा अर्थराइटिस मरीजों की संख्या बढ़ी है।
अर्थराइटिस के रोगियों में लक्षण एक समान नहीं होते हैं
किसी को बुखार, लिम्फ नोड्स में सूजन, वजन में कमी, थकान, हाथ का उपयोग करने में असमर्थता, चलने में कठिनाई और खराब नींद का अनुभव हो सकता है।
इलाज: गठिया का इलाज व्यावसायिक या भौतिक चिकित्सा, व्यायाम और ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवा के माध्यम से किया जा सकता है। आयुर्वेद, औषधीय तेलों से मालिश और होम्योपैथी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा से भी शुरुआती दौर में राहत मिलती है। दिल्ली एम्स के अध्ययन में पता लगा है कि योग के जरिये अर्थराइटिस पर काफी हद तक नियंत्रण पा सकते हैं।
बचाव
शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखें और समझदारी से खाएं। अपने वजन पर नियंत्रण रखें और नियमित रूप से व्यायाम करें जो कि घुटने की समस्याओं को
दूर रखने के मंत्र हैं।
अपनी मुद्रा पर ध्यान दें, ऊंची एड़ी की सैंडिल से बचें और चोट से बचें। अपने विटामिन बी 12 और विटामिन डी 3 के स्तर पर नियमित नजर रखें, गठिया के मामले में विटामिन डी 3 थोड़ा अधिक महत्वपूर्ण है।