महिला एवं बाल विकास मंत्री ने अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि धर्म के आधार पर आरक्षण संविधान द्वारा निषिद्ध है। ईरानी ने यह भी कहा कि सदन में पहली बार यह स्वीकार किया गया कि स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विधेयक, किसी एक परिवार विशेष को नहीं, बल्कि पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में मिला, जिनके पार्थिव शरीर को यहां कांग्रेस कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।
आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करने की विपक्ष की मांग पर ईरानी ने जनगणना और परिसीमन के संबंध में संविधान के प्रावधानों को पढ़कर सुनाया ताकि इस बात पर जोर दिया जा सके कि विधेयक में इसे शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'क्या यह विपक्षी नेताओं की इच्छा है कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन न किया जाए? क्या हमें संविधान का पालन नहीं करना चाहिए? क्या विपक्षी दलों ने यही रुख अपनाया है?
ईरानी ने कहा, 'अगर विपक्ष महिलाओं के सशक्तिकरण के रास्ते में रोड़ा नहीं बनता है तो हम आभारी होंगे।' ईरानी ने संप्रग सरकार द्वारा लाए गए और 2010 में राज्यसभा में पारित महिला आरक्षण विधेयक का हवाला देते हुए दावा किया कि तब कांग्रेस का प्रस्ताव 15 साल में महिलाओं को दिया गया आरक्षण वापस लेने का था।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में और इससे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कई उपायों को सूचीबद्ध किया और महिला सशक्तिकरण के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र किया। ईरानी ने कहा कि जेंडर बजट पहले 90,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2,23,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।