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कोरोना काल में भूख से घर न टूटे, कंधे पर कुदाली रख निकल पड़ीं ग्रामीण महिलाएं, मनरेगा में पुरुषों को छोड़ा पीछे

सार

इस वर्ष मनरेगा का आंकड़ा देखें तो उसमें भी महिलाओं ने अपनी संजीदगी और मेहनत का लोहा मनवाया है। 16 जुलाई तक 293.03 लाख पुरुषों ने मनरेगा में काम किया है, जबकि इन साढ़े सात महीनों में काम हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या 328.07 लाख रही है...
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मनरेगा योजना - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा तो काम-धंधे ठप हो गए। लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में ग्रामीण परिवार की महिलाओं ने मोर्चा संभाला। भूख से घर न टूटे, इसलिए कंधे पर कुदाली रख ग्रामीण महिलाएं तालाब या नहर खोदने निकल पड़ीं। महिलाओं ने 'मनरेगा' के तहत मिले रोजगार में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। केंद्र सरकार ने 2020-21 में महात्मा गांधी नरेगा के तहत 1.87 करोड़ नए जॉब कार्ड जारी कर दिए। यह संख्या 2019-20 में जारी 69.53 लाख जॉब कॉर्ड के मुकाबले 169 फीसदी अधिक रही। साल 2020-21 के दौरान मनरेगा के अंतर्गत 553.21 लाख पुरुषों को रोजगार मिला था, जबकि इसी अवधि में महिलाओं की संख्या 565.83 लाख रही है। इस वर्ष मनरेगा का आंकड़ा देखें तो उसमें भी महिलाओं ने अपनी संजीदगी और मेहनत का लोहा मनवाया है। 16 जुलाई तक 293.03 लाख पुरुषों ने मनरेगा में काम किया है, जबकि इन साढ़े सात महीनों में काम हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या 328.07 लाख रही है।

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महिलाएं ज्यादा संजीदगी से परिवार को संभाल सकती हैं: रंजना कुमारी

महिला अधिकार कार्यकर्ता और 'सेंटर फॉर सोशल रिसर्च' संस्थान की निदेशक रंजना कुमारी बताती हैं, ये तथ्य सर्वविदित है कि महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा संजीदगी से अपने परिवार की देखभाल कर सकती हैं। दवाई, कमाई या पढ़ाई, परिवार में इन सभी अवधारणाओं पर खरा उतरने में महिला अपनी जान लगा देती हैं। अगर महिला के पास स्किल है तो वह बच्चों का बेहतर तरीके से लालन पालन कर सकती है। महिला दिन-रात मेहनत कर यह सुनिश्चित करती है कि उसका परिवार कष्ट से दूर रहे। खासतौर पर भारतीय महिला तो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। वह अपने बच्चों को भूखा मरते हुए नहीं देख सकती। काम चाहे कोई भी हो, महिलाओं ने उसे कभी छोटा नहीं समझा। हर तरह की चुनौती स्वीकार की है। मनरेगा का उदाहरण दुनिया के सामने है। कोरोनाकाल में अपने परिवार को मुसीबत से बचाने के लिए महिलाओं ने कुदाली कंधे पर उठा ली।
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मनरेगा के तहत इतनी महिलाओं व पुरुषों को मिला काम ...  

वित्तीय वर्ष 2020-21 में 553.21 लाख पुरुषों को मनरेगा के अंतर्गत काम मिला था। इसी अवधि ने 565.83 लाख महिलाओं ने मनरेगा में रोजगार पाया है। अगर 2021-22 में 16 जुलाई तक की स्थिति देखें तो 293.03 लाख पुरुषों और 328.07 लाख महिलाओं को रोजगार दिया गया है। साल 2020-21 में 187.90 लाख जॉब कार्ड शामिल किए थे। इस साल अभी तक 42.08 लाख जॉब कार्ड जारी हुए हैं। पिछले साल तमिलनाडु और राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं ने मनरेगा के तहत मिले रोजगार में पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दिया था। तमिलनाडु में जहां 14.88 लाख पुरुषों को काम मिला तो वहीं 63.65 लाख महिलाओं ने मनरेगा में रोजगार पाया था।

राजस्थान में मनरेगा के अंतर्गत 45.84 लाख पुरुष और 65.14 लाख महिलाओं को काम दिया गया। केरल में 3.24 लाख पुरुषों व 15.59 लाख महिलाओं ने मनरेगा में काम किया है। आंध्र प्रदेश में 37.14 लाख पुरुषों के मुकाबले 42.65 लाख महिलाओं ने रोजगार हासिल किया था। बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और तेलंगाना सहित कई राज्यों में भी महिलाओं ने मनरेगा के तहत रोजगार पाने में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। इस साल में जुलाई तक तेलंगाना में पुरुषों को 18.02 लाख, जबकि 23.71 लाख महिलाओं ने मनरेगा में काम किया है। पंजाब में 2.64 लाख पुरुषों के मुकाबले 4.31 लाख महिलाएं, राजस्थान में 17.30 लाख पुरुष और 30.36 लाख महिलाएं, तमिलनाडु में 8.04 लाख पुरुष व 43.54 लाख महिलाएं और आंध्रप्रदेश में 32.11 लाख पुरुषों के मुकाबले 38.48 लाख महिलाओं को मनरेगा के तहत काम मिला है।
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