कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय की आरक्षण से जुड़ी मांगों को नहीं मानती है, तो वह आचार संहिता लागू होने के 48 घंटे के भीतर विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे। जरांगे ने कहा कि अगर उनके समर्थक चुनाव लड़ाने का फैसला करते हैं, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लेंगे और सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा-राकांपा गठबंधन से मुकाबला करेंगे।
जरांगे ने कहा, हम आचार संहिता का इंतजार कर रहे हैं। अगर हमारी मांगें उस समय तक स्वीकार नहीं की गई, तो हम 48 घंटे में विधानसभा चतुनावों की रणनीति का खुलासा करेंगे। मैं उन्हें (सत्तारूढ़ गठबंधन) सोने नहीं दूंगा। जरांगे ने बीते एक साल से अधिक समय में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कई धरने और आंदोलन किए हैं।
उन्होंने कहा, (उप मुख्यमंत्री) देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि उन्होंने 80 फीसदी सीटों का बंटवारा किया है। लेकिन मैं कहता हूं कि उनका 80 फीसदी काम खराब हो गया है।
जब उनसे पूछा गया कि असंतुष्ट मराठा समुदाय ने सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों को 113 निर्वाचन क्षेत्रों में हराने का लक्ष्य रखा है, तो उन्होंने कहा, अगर मराठा आरक्षण का मुद्दा हल नहीं होता तो हमारे पास 113 उम्मीदवारों की सूची है, जिन्हें हम हराना चाहते हैं। लेकिन हम किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। अगर हम चुनाव लड़ने का फैसला लेते हैं, तो हमारे उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में होंगे।
हरियाणा विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीतने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हर राज्य के मुद्दे अलग होते हैं। उन्होंने कहा, हरियाणा में सभी ने भाजपा के लिए वोट नहीं दिया होगा। लेकिन भाजपा को सत्ता में आने के बाद उन लोगों को छोड़ने की आदत है, जो उनकी मदद करते हैं। यहां मराठा समुदाय है और आंदोलन अभी भी जारी है। जरांगे ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में 55 फीसदी लोग मराठा समुदाय से हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में 55 फीसदी लोग मराठा समुदाय से आते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लगभग हर निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम एक लाख मराठा मतदाता हैं। हमारे पास उम्मीदवारों को हराने की क्षमता है।