भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने आज शून्य काल में ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगम के महापौरों तक को वेतन, भत्ता और पेंशन दिये जाने की मांग की।
देश में जनप्रतिनिधियों की दो कैटेगरी है। एक में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और सांसद-विधेयक जैसे लोग आते हैं जिनके लिए संविधान में वेतन और पेंशन की व्यवस्था है। वहीं, ग्राम प्रधान और नगर निगमों के जनप्रतिनिधि भी जनता का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन इसके बाद भी उनके लिए वेतन-पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है। भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने संसद में मांग की है कि उचित कानून परिवर्तन कर इस भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए।
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने आज शून्य काल में ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगम के महापौरों तक को वेतन, भत्ता और पेंशन दिये जाने की मांग की और कहा कि इसके लिए संविधान संशोधन करते हुए इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। अग्रवाल ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन प्राप्त करना जनप्रतिनिधियों सहित सभी नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन भारत में स्वयं जनप्रतिनिधियों में ही दो वर्ग बना दिए गए हैं।
एक वर्ग को संवैधानिक प्रावधानों के तहत बाकायदा कानून बनाकर वेतन, भत्ते और पेंशन देने की व्यवस्था की गई है। जबकि ग्राम प्रधानों से लेकर नगर निगमों के महापौर तक किसी के लिए भी वेतन, भत्ते और पेंशन की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि 1991-92 में संविधान के 73-74वें संशोधन का ढिंढोरा तो बहुत पीटा गया, लेकिन जनप्रतिनिधियों का आर्थिक सशक्तिकरण नहीं किया गया। यह भेदभाव समाप्त किया जाना चाहिए और इन जनप्रतिनिधियों को भी उचित वेतन-भत्ता दिए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।