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Explainer: बारिश में क्यों डूब जाते हैं बड़े-बड़े शहर, सड़कों पर क्यों होता है जलभराव? जानें तीन बड़े कारण

Fri, 23 Sep 2022 04:59 PM IST
हिमांशु मिश्रा रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हल्की सी बारिश में ही क्यों शहर के शहर डूब जाते हैं? सीवेज मैनेजमेंट क्यों काम नहीं आता? जल निकासी के तमाम दावे मौका पड़ने पर हवा-हवाई क्यों हो जाते हैं? इसको लेकर हमने एमएनएनआईटी प्रयागराज के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आरपी तिवारी से बात की। उन्होंने देश में जलजमाव की स्थिति को लेकर तकनीकी पहलुओं पर बात की। आइए समझते हैं...
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दिल्ली में बारिश से जलभराव की स्थिति। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में इन दिनों भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त है। शहर के शहर जलमग्न हैं। सड़कों पर लबालब पानी भरा है। इसके पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी यही हालत थी।  दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में खूब बारिश हो रही है। सड़कों पर जलजमाव ने हालात खराब कर दिए हैं। जगह-जगह पानी भरने के चलते पूरे शहर की ट्रैफिक ठप हो गया है। 
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अब आप सोच रहे होंगे कि हल्की सी बारिश में ही क्यों शहर के शहर डूब जाते हैं? सीवेज मैनेजमेंट क्यों काम नहीं आता? जल निकासी के तमाम दावे मौका पड़ने पर हवा-हवाई क्यों हो जाते हैं? इसको लेकर हमने एमएनएनआईटी प्रयागराज के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आरपी तिवारी से बात की। उन्होंने देश में जलजमाव की स्थिति को लेकर तकनीकी पहलुओं पर बात की। आइए समझते हैं...
 
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बारिश में गुरुग्राम बस अड्डा बना बच्चों के लिए तालाब - फोटो : सुदर्शन झा
पहले जानिए अभी बारिश से क्या हालात हैं? 
अभी दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान समेत कई राज्यों में बारिश हो रही है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। आगामी दो दिनों के लिए उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं शनिवार को पश्चिमी यूपी में बारिश बढ़ने की उम्मीद है।  मध्य प्रदेश और हरियाणा में भी छिटपुट जगहों पर भारी वर्षा के साथ व्यापक वर्षा होने के आसार हैं।


 
बारिश के कारण शामली जिले की तीनों तहसीलों की अग्निवीर भर्ती परीक्षा शुक्रवार को रोक दी गई। अब यह भर्ती 11 अक्तूबर को कराई जाएगी। हरियाणा के गुरुग्राम में लगातार बारिश के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां आज सुबह से बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है, जिस कारण कई जगह पर जलभराव हो गया है। 
 

दिल्ली एनसीआर में लगातार बारिश हो रही है। - फोटो : सोशल मीडिया
क्यों हो रही इतनी बारिश? 
मौसम विभाग के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश व दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर निम्नस्तर पर चक्रवाती स्थिति बनने के कारण दिल्ली-एनसीआर व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश रिकॉर्ड हो रही है। अगले 24 घंटे में भी इस स्थिति के बने रहने का अनुमान है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में बारिश का दौर जारी रहेगा।

मौसम विभाग के अनुसार, 24 सितंबर को उत्तराखंड, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा 25 सितंबर को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बारिश के आसार हैं। 
 

ड्रेनेज सिस्टम - फोटो : सोशल मीडिया
बारिश में क्यों डूब जाते हैं कई शहर? 
हमने ये समझने के लिए एमएनएनआईटी प्रयागराज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी तिवारी से बात की। उन्होंने जलजमाव के लिए तीन बड़े कारण बताए

1. जलनिकासी की कमजोर व्यवस्था: लगभग हर शहर में जल निकाली को लेकर लाखों करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। सीवेज लाइन, नालियां बनाई जाती हैं। इसपर मोटी रकम खर्च होती है और दावा होता है कि बारिश में जलभराव की स्थिति नहीं होगी, लेकिन शुरुआत से ही जलनिकाली की सुविधा बेहद कमजोर होती है। बिना मानक, स्ट्रक्चरल ज्ञान के ही जहां मन होता है, वहीं से जल निकासी की सुविधा दे दी जाती है। फौरी तौर पर भले ही ये काम आ जाए, लेकिन लॉन्ग टर्म इसका सही प्रयोग नहीं हो पाता है। फिर एक समय आता है जब ये जल निकाली की सुविधा पूरी तरह से फेल हो जाती है।

पुराने शहरों में नई-नई इमारतें तो बन रहीं हैं, लेकिन ड्रेनेज मैनेजमेंट को लेकर कोई खास काम नहीं होता है। अगर कोई सिस्टम बनता भी है तो वह केवल कुछ क्षेत्र या गली के हिसाब से बनता है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हर जिले का अपना अलग ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए और शहर की आबादी, रियायशी इलाकों और आने वाले 100 साल की संभावनाओं को देखकर तैयार करना चाहिए। इसके इंजीनियरिंग में भी बेहद गंभीरता से काम करने की जरूरत है। कई जगह ड्रेनेज सिस्टम ऊपर-नीचे हो जाता है, जिससे पानी का फ्लो बाहर निकलने की बजाय वहीं ठहर जाता है। 
 

लोग सड़क किनारे कूड़े फेंक देते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
2. साफ-सफाई की खराब हालत : कई जगह ठीक ड्रेनेज सिस्टम गंदगी की वजह से ध्वस्त हो जाता है। आमतौर पर लोग पॉलीथीन, बैग व घरों से निकलने वाले हैवी कूड़े, खाना व अन्य सामग्री सड़कों पर फेंक देते हैं। यही कूड़ा सड़कों से उड़कर नालियों में आ जाता है। जिससे नाला और नाली जाम हो जाते हैं। धीरे-धीरे नाले और नालियों में इतनी गंदगी आ जाती है कि उसमें से पानी निकलने का रास्ता ही नहीं बचता है।

ऐसी स्थिति में हल्की सी भी बारिश होती है तो पूरा पानी सड़कों पर एकत्रित हो जाता है। इसलिए बारिश का मौसम आने से पहले सभी छोटे-बड़े नालों की पूरी साफ-सफाई बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं, ये नालियां ऐसी होनी चाहिए कि इसमें कूड़ा न एकत्रित हो पाए। आम लोगों को भी इसके लिए ध्यान देने की जरूरत है। 
 
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सड़कों की खुदाई से भी ड्रेनेज सिस्टम बिगड़ जाती है। - फोटो : सोशल मीडिया
3. प्रॉपर प्लानिंग की कमी
आमतौर पर हर जिले में जल विभाग, बिजली विभाग, सड़क निर्माण विभाग, नगर निगम, नगर पालिका सब अलग-अलग तरह से काम करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि एक ही सड़क को अलग-अलग विभाग वाले कई बार खोद देते हैं। ये भी ड्रेनेज सिस्टम को बर्बाद करने का एक बड़ा कारण है। अगर कोई सड़क खोदता है तो उसे समय पर दुरूस्त किया जाना चाहिए।

केवल मिट्टी या मलबे को भर देने से ड्रेनेज सिस्टम पर असर पड़ता है। बारिश के दौरान सारी मिट्टी बहकर नाले और नाालियों में चली आती है। जिससे नाला पैक हो जाता है और जल निकासी की व्यवस्था पर असर पड़ता है। ये भी देखना चाहिए कि सड़क की खुदाई के चलते सीवर या सड़क के नीचे से निकलने वाली कोई पाइप तो क्षतिग्रस्त नहीं हुई है।

इसी तरह सड़क की खुदाई के दौरान अक्सर बगल की नाली और नाले को भी तोड़ दिया जाता है। ऐसा भी नहीं होना चाहिए। हर शहर में नाले और नालियों के सहारे ही पानी को बाहर निकाला जाता है। इसे नदियों में मिला दिया जाता है।
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