ये माना जाता है कि अगर अंग्रेज अफसर जनरल डायर ना होते तो जलियांवाला बाग हत्याकांड भी ना होता। डायर का पूरा नाम कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर था। डायर ने फैसला लिया था कि वह भारतीयों को सबक सिखाएंगे।
डायर की मौत के 91 साल बाद भी उन्हें जनरल डायर नहीं बल्कि अमृतसर का कसाई कहा जाता है। 13 अप्रैल, 1919 ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। इसी दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट के विरोध में हजारों लोग एकत्र हुए थे।
अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारंबद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थी।
इस घटना में तकरीबन 1000 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। लेकिन ब्रिटिश सरकार मरने वाले लोगों की संख्या 379 और घायल लोगों की संख्या 1200 बताती है। ये लोग यहां रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए थे।
इस मामले पर इतिहासकारों का कहना है कि जब ये घटना हुई तो वहां जनरल डायर मौके पर मौजूद थे। लेकिन लोगों पर गोलीबारी चलाने का निर्देश पंजाब के तत्कालीन गर्वनर जनरल माइकल फ्रांसिस ओ'ड्वायर ने दिया था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के इतिहास में विशेषज्ञ इंदु बंगा का कहना है, "ड्वायर एक कट्टर साम्राज्यवादी थे, जो जलियांवाला बाग हत्याकांड के जिम्मेदार थे। वहीं डायर तो केवल उनके आदेशों का पलान कर रहे थे।" बंगा का कहना है कि सेवानिवृति के बाद भी ड्वायर भारतीयों के लिए किसी भी रियायत का विरोध करते रहे थे।
बंगा का कहना है, ड्वायर ने डायर के समारक के लिए पैसे जुटाए थे। दोनों व्यक्तियों का जन्म 1864 में हुआ। भारतीय क्रांतिकारी उधम सिंह ने लंदन के कैक्सटन हॉल में 13 मार्च, 1940 को ड्वायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं डायर की मौत आर्टेरिओस्क्लेरोसिस (धमनियों की बीमारी) और सेरेब्रल हैमरेज के कारण 1927 में हुई थी।
बहुत ही कम लोगों को ये बात पता है कि डायर का जन्म और पालन पोषण पंजाब में हुआ था। वह जितनी अच्छी अंग्रेजी जानते थे, उतनी ही अच्छी हिंदी भी जानते थे। डायर की पसंदीदा तस्वीरों में से एक, सिख अफसर के साथ थी।
बताया जाता है कि जो भी डायर ने उस दौरान किया वो वही था, जो ब्रिटिश शासन चाहता था। लेकिन हंटर कमीशन ने बाद में केवल डायर को इस घटना का दोषी ठहराया। डायर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर भी किया गया।
ब्रिटिश लेखक एल्फ्रेड ड्रेपर ने अपनी किताब, 'Amritsar: The masaccre that ended the raj' में कहा है कि 13 अप्रैल, 1919 को 55 वर्षीय डायर भी बाकी लोगों की तरह ही थे। उनके बॉडीगार्ड सर्जेंट विलियम एंडरसन ने उस घटना को लेकर कहा था कि भीड़ ऐसी लग रही थी जैसे "सफेद कपड़ों की झड़ी जमीन पर गिरी हो।"
जब सैनिकों की बंदूकें खाली हो गईं, तो डायर ने दोबारा उन्हें लोड करने को कहा और भीड़ पर गोलीबारी करने का आदेश दिया।
आपके लिए- 13 अप्रैल, 1919 ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। इसी दिन अंग्रेज अफसर ने सैकड़ों लोगों पर गोलियों की बरसात करवा दी। वो भी बिना किसी चेतावनी के। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरिजा मे ने भी बुधवार को इस घटना के प्रति खेद प्रकट किया है।