देश की राजधानी में शुक्रवार को आयोजित एक गरिमामयी समारोह में बच्चों की असाधारण प्रतिभा और साहस को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला। द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि ये बच्चे भारत के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर हैं। बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण, खेल, कला-संस्कृति और विज्ञान-तकनीक जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को यह सम्मान दिया गया।
इस समारोह में सबसे अधिक चर्चा 16 वर्षीय पर्वतारोही विश्वनाथ कार्तिकेय पदकांति की रही। उन्होंने दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर ‘सेवन समिट्स’ पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ वह सबसे कम उम्र के भारतीय और दुनिया के दूसरे सबसे युवा व्यक्ति बने। इसके अलावा, तबला वादक सुमन सरकार सहित अन्य बच्चों को भी उनकी प्रतिभा के लिए सम्मानित किया गया।
कम उम्र में बड़ी कामयाबी
विश्वनाथ कार्तिकेय पदकांति ने कहा कि इस पुरस्कार से उन्हें और लोगों को प्रेरित करने की ताकत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहण में अनुशासन सबसे अहम है और रोमांच के नाम पर प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसी सोच के साथ वह ‘ग्रीन अर्थ गार्डियंस’ के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि युवाओं की जिम्मेदार सोच ही देश को आगे ले जाएगी।
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राष्ट्रपति का संदेश: प्रेरणा का स्रोत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इन बच्चों ने अपने परिवार, समाज और पूरे देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देशभर के बच्चों को आगे बढ़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा देगा। राष्ट्रपति ने कहा कि यह सम्मान बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करने और उनकी मेहनत को पहचान देने का माध्यम है।
इतिहास से सीख और साहस की विरासत
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह और उनके साहिबजादों के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 320 साल पहले सत्य और न्याय के लिए दिए गए बलिदान आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि साहस और नैतिकता की यही परंपरा आज के बच्चों में भी दिखाई दे रही है।
भविष्य की ओर आत्मविश्वास भरा कदम
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार ने यह साबित किया है कि उम्र कभी भी प्रतिभा और हौसले की सीमा नहीं होती। पर्वतारोहण से लेकर संगीत तक, इन बच्चों की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। समारोह के अंत में यह साफ हुआ कि ये बाल प्रतिभाएं आने वाले समय में भारत की पहचान को और मजबूत करेंगी।
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