कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की ताकत आखिर कौन है? बीएस येदियुरप्पा पर कांग्रेस और जद(एस) दोनों ही दलों ने एचडी कुमारस्वामी की सरकार को छठवीं बार अपदस्थ करने का आरोप लगाया है। इस सवाल के जवाब में भाजपा के नेता कुछ नहीं बोलते। पार्टी के कई नेता मुस्कराकर रह जा रहे हैं। येदियुरप्पा भाजपा में सक्रिय राजनीति के लिए निर्धारित 75 साल की उम्र को भी पार कर चुके हैं, लेकिन वह राज्य का मुख्यमंत्री बनने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वह कर्नाटक विधानसभा में मत विभाजन की स्थिति आने पर उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।
भाजपा ने कहा था नहीं गिराएंगे सरकार
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी ने इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की थी, लेकिन नेताओं के हवाले से यह बात सामने आई थी कि भाजपा कर्नाटक या किसी राज्य सरकार को अपदस्थ नहीं करने के अभियान में शामिल नहीं होगी। यहां तक कि पश्चिम बंगाल को लेकर भाजपा ने ममता बनर्जी को उनके हाल पर छोड़कर अपना राजनीतिक अभियान तेज करने का निर्णय लिया था। पश्चिम बंगाल के प्रभारी भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीज का मानना था कि राज्य के टीएमसी विधायक अपनी सरकार से संतुष्ट नहीं हैं। टीएमसी के कार्यकर्ता खुद अपनी पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। इसलिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सहानुभूति का लाभ देना ठीक नहीं है। लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के अमेरिका दौरे पर जाते ही कांग्रेस और जद(एस) के विधायकों ने बागी रुख अख्तियार कर लिया।
कांग्रेस के नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या ने इसे आपरेशन लोटस करार दिया। कांग्रेस नेताओं के जवाब में भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी। लेकिन राजनीति के खेल ने फिर हाथ किसी का और दस्ताना किसी का संदेह पैदा कर दिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के संभलकर चलने के बावजूद येदियुरप्पा की महत्वाकांक्षा ने इस संदेह को बल दे दिया है।
कौन है येदियुरप्पा की ताकत?
येदियुरप्पा कर्नाटक भाजपा के बड़े कद्दावर नेता हैं। कर्नाटक में कमल येदियुरप्पा की सूझबूझ से खिला था। लिंगायत समुदाय के येदियुरप्पा की राज्य में मजबूत पकड़ है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छा समीकरण रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। 75 साल के होने जा रहे येदियुरप्पा के नेतृत्व में कर्नाटक में भाजपा ने 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। चुनाव नतीजा आने के बाद येदियुरप्पा ने भाजपा के अल्पमत में होने के बाद भी सरकार बनाने का दावा पेश किया और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का समर्थन हासिल था। यह बात अलग है कि येदियुरप्पा कुछ दिन ही मुख्यमंत्री रह पाए। विश्वासमत न हासिल कर पाने की स्थिति देखकर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद येदियुरप्पा पर लगातार एचडी कुमारस्वामी सरकार को अपदस्थ करने का आरोप लगता रहा।
येदियुरप्पा की दूसरी ताकत उनकी पकड़ है। जद(एस), कांग्रेस के गठजोड़ के बावजूद भाजपा ने लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में शानदार प्रदर्शन किया। भाजपा ने 28 लोकसभा सीटों में से 25 पर जीत हासिल कर लिया। सदानंदगौड़ा और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अनंतकुमार के कुछ समर्थकों को छोड़ दें तो भाजपा में कोई येदियुरप्पा के सामने नहीं है। गली जनार्दन रेड्डी, श्रीरामालु जैसे नेता भी येदियुरप्पा के साथ हैं। केएस ईश्वरप्पा जैसे नेता भी हथियार डाल चुके हैं। कहा जाता है कि अनंत कुमार की पत्नी को टिकट मिलने की बजाय सूर्या को प्रत्याशी बनाया जाने में भी येदियुरप्पा की राय अहम थी।