नोएडा से आई 10 वर्षीय तमन्ना ने बताया, मौजूदा हालात में हमारा भविष्य अंधेरे में दिख रहा है। अब हम बिना शिक्षा और अवसरों के गरीब शरणार्थी बन गए हैं और तालिबान की मौजूदगी में घर जाने की सोच भी नहीं सकते।
भारत आए अफगान शरणार्थियों के बच्चों को भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है। उन्होंने दुनिया से मदद की गुहार लगाई है।
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दक्षिण दिल्ली से अपने माता-पिता के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लेने आईं 10 साल की दीया और 12 वर्षीय दीयाना ने बताया, हम खौफजदा हैं क्योंकि हमें तालिबान की असलियत पता है। उन्होंने हमारे पैदा होने से पहले काफी जुल्म ढहाए थे।
नोएडा से आई 10 वर्षीय तमन्ना ने बताया, मौजूदा हालात में हमारा भविष्य अंधेरे में दिख रहा है। अब हम बिना शिक्षा और अवसरों के गरीब शरणार्थी बन गए हैं और तालिबान की मौजूदगी में घर जाने की सोच भी नहीं सकते।
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शरणार्थी और बच्चों के रूप में हम असुरक्षित महसूस करते हैं। हमें यह सोचकर डर लगता है कि अब अफगानिस्तान में महिला और बच्चों के साथ कैसा बर्ताव किया जाएगा।
- तिलक नगर से आठ साल के भाई मोहम्मद रमीन के साथ पहुंची 10 वर्षीय जुलेखा खादरखिल
विमान में जन्मी बच्ची का नाम ‘रीच’
अफगानिस्तान से लोगों को ले जा रहे सी-17 सैन्य विमान में एक अफगान बच्ची का जन्म हुआ है। इस जन्म से विमान में सवार यात्रियों के चेहरे खुश हो गए और उन पर मुस्कान आ गई। बच्ची के माता-पिता ने उसका नाम विमान के कॉल संकेत के नाम पर ‘रीच’ रख दिया है।
विमान संख्या के साथ कॉल संकेत हवाई यातायात कर्मियों तथा रेडियो वॉयस संचार के लिए विमान की पहचान होता है। इस विमान ने काबुल से जर्मनी के रमस्टीन वायु सेना अड्डे के लिए उड़ान भरी थी।
विमान ऊंचाई पर ले गए...बढ़ाया हवा का दबाव
निम्न रक्तचाप के कारण महिला की हालत बिगड़ गई। हवा का दबाव बढ़ाने के लिए विमान ऊंचाई पर ले जाया गया। सेना के चिकित्सा कर्मियों ने विमान में प्रसव कराया।