जीत के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दोनों विधायकों को शपथ ग्रहण के लिए राजभवन आमंत्रित किया था, लेकिन विधायकों ने राजभवन में शपथ ग्रहण करने से इनकार कर दिया। विधायकों की मांग है कि उन्हें विधानसभा में शपथ दिलाई जाए और इसके लिए राज्यपाल को स्पीकर या सदन के उपाध्यक्ष को जिम्मेदारी देनी चाहिए।
नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन गुरुवार को छठे दिन भी जारी रहा। टीएमसी विधायकों ने बंगाल विधानसभा परिसर में धरना दिया। विधायकों की मांग है कि उन्हें राजभवन की बजाय सदन में शपथ दिलाई जाए। विधायक सायंतिका बंदोपाध्याय और रयात हुसैन सरकार 27 जून से प्रदर्शन कर रहे हैं। बंदोपाध्याय और रयात हुसैन ने विधानसभा परिसर में डॉ. बी आर आंबेडकर की प्रतिमा के नजदीक धरना दिया। विधायकों ने अपने हाथों में तख्तियां ली हुई हैं, जिन पर लिखा है कि 'हम राज्यपाल का इंतजार कर रहे हैं'।
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नवनिर्वाचित विधायक अभी तक नहीं ले पाए हैं शपथ
बारानगर सीट और भांगबंगोला सीट पर हुए उपचुनाव में क्रमशः सायंतिका बंदोपाध्याय और रयात हुसैन ने जीत दर्ज की थी। जीत के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दोनों विधायकों को शपथ ग्रहण के लिए राजभवन आमंत्रित किया था, लेकिन विधायकों ने राजभवन में शपथ ग्रहण करने से इनकार कर दिया। विधायकों की मांग है कि उन्हें विधानसभा में शपथ दिलाई जाए और इसके लिए राज्यपाल को स्पीकर या सदन के उपाध्यक्ष को जिम्मेदारी देनी चाहिए। राज्यपाल ने अभी तक इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है, जिसकी वजह से विधायकों का शपथ ग्रहण अटका हुआ है। शपथ न लेने की वजह से नवनिर्वाचित विधायक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका शुरू नहीं कर सके हैं।
स्पीकर ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
राज्यपाल और विधायकों के बीच जारी इस खींचतान को लेकर स्पीकर बिमान बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है और उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उल्लेखनीय है, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधायकों के पास संविधान के प्रावधानों के अनुसार शपथ लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 188 और अनुच्छेद 193 राज्यपाल को इस तरह का अधिकार देते हैं। अनुच्छेद 188 में कहा गया है कि राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य को राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेगा।
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'यदि कोई विधायक अनुच्छेद 188 के तहत शपथ लेने से पहले विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होता है तो अनुच्छेद 193 के तहत उसके लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही शपथ से पहले विधायक विधानसभा में मतदान करता है, तो वह प्रत्येक दिन के लिए, जिस दिन वह बैठता है या मतदान करता है, पांच सौ रुपये के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा, जिसे राज्य को देय ऋण के रूप में वसूला जाएगा।'