नागरिकता संशोधन अधिनियम(सीएए) लागू होते ही राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ी हुई है। बात अगर पश्चिम बंगाल की करें तो यहां भी सीएए को लेकर बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वास्तविक नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे बिना किसी डर के आराम से रह सकते हैं।
नदिया जिले के राणाघाट में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए, भाजपा नेता ने कहा कि देश में सदियों से रह रहे मुसलमान वास्तविक नागरिक हैं। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे सीएम ममता के झूठे दावों से गुमराह न हों और बिना किसी डर या परेशानी के आराम से रहें।
बता दें कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को दावा किया था कि सीएए देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने से पहले का कदम है। उन्होंने कहा, 'मुझे आशंका है कि मौजूदा नागरिकों को पहले स्वचालित रूप से अवैध अप्रवासी के रूप में नामित किया जाएगा और फिर समिति के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।'
अधिकारी ने यह भी दावा किया कि यह कानून उन तीन करोड़ बंगाली हिंदुओं को सक्षम बनाएगा, जिन्हें तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था, ताकि वे हमेशा के लिए अपने नागरिकता अधिकारों की पुष्टि कर सकें।
भाजपा नेता ने आगे कहा, 'सीएम ममता वोट के लिए लोगों को गुमराह करने और उकसाने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए कृपया उनके जाल में न पड़ें। हर वास्तविक मुस्लिम नागरिक खुशी से रहे, क्योंकि वे भी हमारे लोग हैं। मुसलमानों, निश्चिंत रहें, आपकी नागरिकता के अधिकार छीनने का एक भी उदाहरण नहीं होगा। अगर ऐसा हुआ तो मैं विधायक पद छोड़ दूंगा।'
विपक्ष को सीएए के बारे में गलत जानकारी: हरदीप
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और दावा किया कि कानून पर उनके द्वारा "पूरी तरह से विकृत तस्वीर" पेश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीएए को लेकर विपक्षी दलों द्वारा बहुत सारी गलत जानकारी वाली चीजें पेश की रही हैं।
मंत्री हरदीप सिंह ने कहा, 'इतनी गलत जानकारी पेश जा रही है। सीएए क्या है? मैं खुद शरणार्थियों का बेटा हूं। मेरे पिता लाहौर से आए थे और मेरी मां और उनका परिवार पेशावर से आया था। यह समझना अच्छा है कि सीएए क्या है और क्या नहीं है।'