कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद न्याय की मांग को लेकर जो जूनियर डॉक्टर सड़कों पर उतरे थे, उन्होंने जन सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें जूनियर डॉक्टरों ने रविवार को हर गली, हर कूचे से रैली निकालने का आह्वान किया। इसी तरह से महालया के दिन यानि दो अक्तूबर को दिन में रैली निकाली जाएगी और उसके बाद धर्मतला में महासम्मेलन किया जाएगा।
आज ‘वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर फ्रंट’ द्वारा आयोजित सम्मेलन में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। न्याय की मांग के लिए मार्च करने वाले रिक्शा चालकों को भी आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा, वरिष्ठ डॉक्टर, प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक, आईटी कर्मी और मोहनबागान-ईस्ट बंगाल समर्थकों को भी इस सम्मेलन में बुलाया गया।
उल्लेखनीय है कि न्याय की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टरों ने 42 दिनों बाद हड़ताल वापस ले ली थी लेकिन वे अपना विरोध जारी रखे हुए थे। आंदोलनकारियों ने कहा कि अब तक उन्होंने क्या सही या गलत किया है और भविष्य में क्या करना चाहिए, इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। वे समाज के सभी स्तरों के लोगों से सलाह लेकर भविष्य में आगे बढ़ना चाहते हैं।
दो नए कार्यक्रमों की घोषणा
जूनियर डॉक्टरों ने दो नए कार्यक्रम की घोषणा की है। देवाशीष ने बताया कि 29 सितंबर और दो अक्तूबर को उनके कार्यक्रम हैं। 2 अक्टूबर को महालया है, उस दिन वे महामार्च की घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद धर्मतला में महासम्मेलन होगा। महालया के दिन यह कार्यक्रम दोपहर एक बजे से शुरू होगा। उससे पहले 29 सितंबर के कार्यक्रम का नाम ‘रहेंगे एक साथ, उत्सव में नहीं विरोध में’ रखा गया है। उस दिन न्याय की मांग के लिए सड़कों और गलियों को भरने के लिए आम जनता को बुलाया गया है।
आंदोलनकारियों में से एक डॉ. अनिकेत ने कहा, कोई भी न्याय नहीं पा रहा है। इसलिए लोग हमारे आंदोलन से जुड़ रहे हैं। यह आग बुझने नहीं देना चाहिए। यह अंकुर मरने नहीं पाए, यह जूनियर डॉक्टरों की ओर से अपील है। न्याय के बिना हमारी और कोई मांग नहीं है। राज्य सरकार की जांच टीम की असमर्थता हर जगह दिख रही है। हमें सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है, यह भी समझना चाहिए। लचीलेपन को हमारी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। न्याय में देरी क्यों हो रही है।
संकेत स्वरूप मूर्ति की स्थापना
जूनियर डॉक्टरों के जन सम्मेलन में यह प्रस्ताव रखा गया कि अस्पताल परिसर में पीड़िता का प्रतीकात्मक मूर्ति रखी जाएगा। पीड़िता का प्रतीक स्वरूप एक पीड़ित महिला की मूर्ति अस्पताल परिसर में रखी जाएगी। यह मूर्ति दो अक्तूबर को रखी जा सकती है।