पश्चिम बंगाल सरकार ने फैसला किया है कि वह राज्य की अंतिम डबल-डेकर बस को संरक्षित करेगी। इस बस ने 2000 के शुरुआती वर्षों में ही सेवाएं बंद कर दी थी। इसके बाद बंगाल सरकार ने बस को स्क्रैप करने (कबाड़ में देने) का फैसला किया था। हालांकि, अब सरकार ने पुराने फैसले को पलट दिया है।
बंगाल के एक वरिष्ठ परिवहन अफसर ने सोमवार को बताया कि बस को रिटायर करने का पिछला फैसला इसके रखरखाव की उच्च लागत के चलते लिया गया था। हालांकि, विभाग ने अब इस बस को म्यूजियम में रखने का फैसला किया है और इसके लिए बस को रेनोवेट किया जाएगा यानी अच्छी स्थिति में लाया जाएगा।
बस में इसे बनाने वाली कंपनी के लोगो के साथ कलकत्ता राज्य परिवहन निगम (सीएसटीसी) का बाघ का प्रतिष्ठित चिह्न भी लगा है। अधिकारी ने कहा कि काफी सोच-विचार के बाद हमने बस को दोबारा ठीक करने और सरकार के एक म्यूजियम में प्रदर्शित करने का फैसला किया है। इसके साथ हाथ से खींचने वाला रिक्शा और डोली के मॉडल भी प्रदर्शन के लिए रखा गया है। इसके जरिए कोलकाता में परिवहन के विकास को दर्शाया गया है।
गौरतलब है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में बस को कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित एक कबाड़ घर ले जाने की तस्वीर वायरल हुई थी। इस तस्वीर के बाहर आने के बाद पूरे बंगाल में लोगों ने रोष जताया था।