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पश्चिम बंगाल: नेताओं का पलायन बना भाजपा के लिए मुसीबत, प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद खामियां तलाशने में जुटी पार्टी

Tue, 21 Sep 2021 04:58 PM IST
Amit Mandal राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा के लिए नेताओं का पलायन एक बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। माना जा रहा  है कि भाजपा ने सुकांत मजूमदार को नया प्रदेश  अध्यक्ष बनाकर इमेज बदलने की कोशिश की है।
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दिलीप घोष - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं के तृणमूल कांग्रेस में जाने के बीच भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की विदाई कर दी है। पार्टी ने उनकी जगह बालुरघाट से पार्टी के सांसद डॉ सुकांत मजूमदार को भाजपा का अध्यक्ष बनाया है। मई में आए विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद अब तक कम से कम तीन विधायक और एक सांसद ने भाजपा को छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया है।  

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सुकांत मजूमदार पीएचडी होने के साथ ही पेशे से शिक्षक और स्वभाव से काफी विनम्र व्यक्ति हैं। इसके अलावा संसद में भी वह काफी सक्रिय रहते हैं और हर चर्चा में हिस्सा लेते हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि दिलीप घोष का जाना तय था क्योंकि उनके अध्यक्ष रहते ही पार्टी की करारी हार हुई है। 294 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने केवल 77 सीटें हासिल की थी। चुनाव के बाद से लगातार भाजपा के विधायक और बड़े नेता टीएमसी में जा रहे हैं जिससे ये संख्या घटकर  71 हो गई है। चुनाव के बाद घोष जिस तरह से पार्टी को संभाल रहे थे उससे हाईकमान खुश नहीं था।

उन्होंने कहा कि जिस तरह तृणमूल की ओर से ताबड़तोड़ हमले हो रहे थे और प्रदेश भाजपा में एक तरह से सुस्ती छाई थी, ऐसे में  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बदलने के अलावा हाईकमान के पास दूसरा कोई चारा नहीं था। वहीं दूसरी ओर पार्टी में घोष के खिलाफ पिछले काफी  समय से विरोध के स्वर मुखर हो रहे थे। विधानसभा चुनाव के बाद कई नेताओं में उनके प्रति नाराजगी भी देखी जा रही थी। उनकी बयानबाजी को लेकर भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में विरोध देखा जा रहा था। इन सब कारणों को देखते हुए घोष को हटाए जाने का फैसला लिया गया है। 
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चुनाव के बाद से ही उत्तर बंगाल पर भाजपा की नजर है। कई बार अलग उत्तर बंगाल राज्य की मांग भी उठने लगी है। इस बीच उत्तर बंगाल  से आने वाले मजूमदार को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के फैसले को पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में मोदी मंत्रिमण्डल में उत्तर बंगाल के दो सांसदों जॉन बारला और निशीथ प्रमाणित को मंत्री भी बनाया गया है।

पूर्व लोकसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अनुपम हाजरा ने अमर उजाला को बताया कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए  भाजपा में शामिल हुए थे। इसलिए अब वे पार्टी छोड़कर जा रहे है। नए प्रदेश अध्यक्ष और नई टीम बनने के बाद पार्टी को नए सिरे से आकलन करना होगा कि क्या खामियां और क्या कारण रहे कि लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। पिछले तीन माह में जो कुछ घटा है, अब उसका विश्लेषण कर आगे बढ़ने की जरुरत है। पार्टी में जो वर्षों से काम कर रहा है अब उनको मौका मिलना चाहिए। जमीनी स्तर पर  जिनकी पकड़ है उनको अवसर दिया जाना चाहिए ताकि पार्टी ज्यादा मजबूत हो सके।

गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के चार विधायक और एक सांसद टीएमसी में शामिल हो चुके हैं। बाबुल सुप्रियो ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को पार्टी की विधानसभा चुनाव में हार के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार बताया था। जुलाई में केंद्रीय मंत्री पद से हटाए जाने के बाद राजनीति छोड़ने की घोषणा करने वाले बाबुल सुप्रियो ने 18 सितंबर को टीएमसी का  दामन थाम लिया।इससे पहले दो मई को नतीजे आने के कुछ दिनों बाद ही मुकल रॉय बीजेपी छोड़कर टीएमसी में शामिल हो गए थे। 

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