आधे मन से कोई लड़ाई कैसे जीती जा सकती है? पश्चिम बंगाल में भाजपा के सामने इसका संकट अब धीरे-धीरे खड़ा होता दिखाई पड़ रहा है। पहले चरण के मतदान में डेढ़ सप्ताह का समय बचा है और दूसरी तरफ घोषित प्रत्याशी चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। पार्टी के पश्चिम बंगाल के उच्चपदस्थ सूत्र का कहना है कि टिकट बंटवारे में भी शायद कसर रह गई। पार्टी के उपाध्यक्ष भी मान रहे हैं कि जहां तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता परिवर्तन की बड़ी लड़ाई चल रही है, वहीं कुछ रसूखदार उम्मीदवारों की कमी रह गई, लेकिन कोई बात नहीं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर सूत्र का कहना है कि राज्य की जनता को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर पूरा भरोसा है।
दो दिन पहले भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे रहा था। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मुकुल राय चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। उन्हें लग रहा था कि वह पूरे राज्य में प्रचार करके भाजपा को अधिक सीटें जितवा सकते हैं, लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए कहा। मुकुल राय को इसके लिए तैयार होने में थोड़ा समय लगा। समझा जा रहा है कि चुनाव लड़कर मुकुल राय अभी खुद को पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। चुनाव बाद पार्टी में मिलने वाली जिम्मेदारी ज्यादा अहम थी।
शिखा मित्रा के पति सोमेन मित्रा कांग्रेस के नेता हैं। पार्टी ने बिना उनसे बिना पूछे ही उन्हें चौरंगी सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया है। शिखा मित्रा ने चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। अब इससे भाजपा की किरकिरी होती है तो हो। शिखा मित्रा ही क्या बेलगछिया सीट से तरुण साहा को उम्मीदवार बनाने से पहले किसी ने उनसे पूछा ही नहीं। बिना चर्चा के उम्मीदवार बनाए जाने पर वह नाराज हैं। उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। भाजपा के कुछ नेता टिकट मांग रहे थे, उन्हें नहीं मिला है। बताते हैं करीब दर्जनभर विधानसभा सीटों पर ये उम्मीदवार पार्टी के लिए ही मुसीबत बने हुए हैं। अभी भी वह खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
पार्टी को चुनाव प्रचार के लिए भी नेता चाहिए। पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इसी को ध्यान में रखकर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी। बताते हैं इससे पहले उन्होंने खुद विधानसभा चुनाव लड़ने में अनिच्छा जताई थी। पार्टी के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के लिए पश्चिम बंगाल में सबकुछ साध पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है, लेकिन विजयवर्गीय राजनीति के धुरंधरों में हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के भरोसेमंद चेहरे में शामिल है। विजयवर्गीय को भरोसा है कि बंगाल में बदलाव आएगा।