पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में भारत-बांग्लादेश सीमा के साथ सैकड़ों वर्ग किलोमीटर में फैले सुंदरवन में सीमाओं को सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है। इस क्षेत्र से मवेशियों, नशीले पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ लगातार एक बड़ी समस्या रही है।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने पहली बार दुर्गम क्षेत्र से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के लिए महिला प्रहरियों को तैनात किया है। सुंदरवन विशाल घने जंगलों और नदियों से घिरा क्षेत्र है।
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पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में भारत-बांग्लादेश सीमा के साथ सैकड़ों वर्ग किलोमीटर में फैले सुंदरवन में सीमाओं को सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है। इस क्षेत्र से मवेशियों, नशीले पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ लगातार एक बड़ी समस्या रही है। चूंकि क्षेत्र में भूमि सीमा चौकियों (बीओपी) का निर्माण संभव नहीं है, इसलिए बीएसएफ फ्लोटिंग बीओपी के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी रखता है। क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने के लिए बीएसएफ की छह नई फ्लोटिंग में से एक बीओपी गंगा को अब पूरी तरह से महिला प्रहरी के कंधों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फ्लोटिंग बीओपी से महिला प्रहरी अब सीमा सुरक्षा का मोर्चा संभाल चुकी हैं और स्वतंत्र रूप से लड़ाकू भूमिका में नजर आएंगी।
पहली बार तैनात की गई महिला सुरक्षाकर्मी
पहली बार है कि महिला प्रहारियों की एक पलटन को सीमा पर गश्त और सुंदरवन जैसे कठिन इलाके में फ्लोटिंग बीओपी के संचालन के लिए तैनात किया गया है। बीएसएफ ने कहा कि उनकी तैनाती तस्करी को रोकने में विशेष रूप से सहायक होगी। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिला तस्कर भी सक्रिय है। दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के प्रवक्ता व डीआइजी अमरीश कुमार आर्य ने बताया कि सुंदरवन जैसे दुर्गम क्षेत्र में पहली बार सीमा की पेट्रोलिंग के लिए महिला जवानों को तैनात किया गया है।