अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमला किए गए तकरीबन 20 दिन हो चुके हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण कई चीजों पर असर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण तमाम वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित शिपिंग के कारण जहां वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है, वहीं अब खाद (फर्टिलाइजर) आपूर्ति बाधित होने के चलते दुनिया भर में खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर बड़ा संकट पैदा हो गया है। 2 मार्च को ईरान की आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी द्वारा होर्मुज जलयडमरूमध्य को बंद घोषित करने के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
उत्तरी गोलार्ध में बुवाई का मौसम
अब खाड़ी देशों से वैश्विक स्तर पर भेजी जाने वाली यूरिया और अन्य खाद की आपूर्ति बाधित हो गई है। आंकड़ों के अनुसार दुनिया के कुल व्यापारिक यूरिया का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र से होर्मुज मार्ग के जरिये निर्यात होता है। गैस आपूर्ति और शिपिंग में रुकावट के कारण खाड़ी क्षेत्र और अन्य जगहों पर कई खाद संयंत्रों को उत्पादन घटाना या बंद करना पड़ा है।
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कतर एनर्जी ने भी दुनिया के सबसे बड़े यूरिया प्लांट का उत्पादन रोक दिया। इसके चलते भारत को तीन यूरिया संयंत्रों व दुनिया के अन्य देशों को भी उत्पादन घटाना पड़ा। यह संकट ऐसे समय में आया है जब उत्तरी गोलार्ध में बुवाई का मौसम (मध्य फरवरी से मई) चल रहा है। व्यावसायिक खेती में अच्छी पैदावार के लिए खाद बेहद जरूरी होती है।
एशियाई देश सबसे ज्यादा प्रभावित
एशियाई देश खाड़ी क्षेत्र से आने वाली खाद पर सर्वाधिक निर्भर हैं। एशिया को खाड़ी से 35% यूरिया, 53% सल्फर व 64% अमोनिया निर्यात होता है। भारत, ब्राजील और चीन जैसे बड़े कृषि उत्पादक देश इस आपूर्ति पर विशेष रूप से निर्भर हैं। ये प्रभावित रहेंगे।