संसद में दूसरे दिन भी हंगामा; पित्रोदा ने किया राहुल का बचाव
संसद में बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। राहुल गांधी टिप्पणी को लेकर हंगामे के बीच दो दिनों के दौरान कोई महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो पाया। कई केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए माफी की मांग की, वहीं कांग्रेस ने अदाणी-हिंडनबर्ग मुद्दे पर अपनी जेपीपीसी की मांग जारी रखी। राहुल गांधी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान पित्रोदा राहुल गांधी के साथ ही थे। उन्होंने सिलसिलेवार कई ट्वीट कर राहुल का मजबूती से बचाव किया है।
ब्रिटेन में राहुल गांधी ने कहीं थीं ये बातें, किसी देश से नहीं मांगी मदद
पित्रोदा ने ट्वीट में कहा- "स्पष्टीकरण के लिए कृपया ध्यान दें कि राहुल गांधी ने मूल रूप से निम्नलिखित बातें कही थीं- 1. भारतीय लोकतंत्र, वैश्विक सार्वजनिक भलाई के लिए है। 2. भारत में लोकतंत्र की स्थिति चिंता का विषय है। 3. यह एक भारतीय समस्या है, और हम इससे निपटेंगे।" उन्होंने कहा कि गांधी ने कभी किसी विदेशी देश को मदद के लिए आमंत्रित नहीं किया।
'गलत सूचना के आधार पर एक सुनियोजित व्यक्तिगत हमला'
प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान देश की दूरसंचार क्रांति का नेतृत्व करने का श्रेय पाने वाले पित्रोदा ने कहा, मैं तार्किक, तर्कसंगत और खुले दिमाग, आंखों और कानों के साथ एक भारतीय पेशेवर के रूप में वहां था। मीडिया के सहयोग से निर्वाचित नेताओं के माध्यम से झूठ और गलत सूचना के आधार पर एक सुनियोजित और सुव्यवस्थित व्यक्तिगत हमला शुरू करने का क्या मतलब है? क्या यही भारतीय लोकतंत्र है? क्या राजनीतिक विमर्श में कुछ शालीनता बची है?
पित्रोदा ने सवाल किया कि कुछ लोग इतने उत्तेजित क्यों हैं और झूठ को बढ़ावा देने में गिरोह बना रहे हैं और हर समय राहुल गांधी पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रोजगार सृजन, अर्थव्यवस्था में सुधार, हिंसा कम करने, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जैसी और भी महत्वपूर्ण चीजें हैं।
पित्रोदा ने राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा, राष्ट्रीय टीवी मीडिया इस पर इतना समय, पैसा और ऊर्जा क्यों खर्च कर रहा है? वे अपने तथ्यों की जांच किए बिना हमेशा राहुल गांधी पर कूदने में क्यों तत्पर रहते हैं? वे सभी क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या यह उचित है? उन्होंने कहा, मैं बस हैरान हूं। मैं भारतीय मीडिया से थोड़ी बेहतर समझ और प्रतिक्रिया की उम्मीद करूंगा। पित्रोदा ने आगे कहा, इन ट्वीट्स का जवाब देने से पहले गहरी सांस लें और कुछ भी कहने से पहले सोचें? सम्मानजनक, गरिमापूर्ण, सच्चे, तथ्यात्मक, जिम्मेदार और थोड़ा उदार बनें। हमें नफरत नहीं बल्कि प्यार की जरूरत है। हमें गलतफहमी नहीं, बल्कि समझ की जरूरत है।