चक्रवाती तूफान रेमल का खतरा बढ़ा
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भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने बताया कि अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती स्थिति बन चुकी है, जिसके सोमवार तक कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने के आसार हैं। इसका प्रभाव आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में पड़ेगा। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा ने कहा कि निम्न दबाव वाले क्षेत्र में चक्रवात के बनने के बाद इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के कारण ओडिशा के तटीय इलाकों में बारिश हो सकती है।
आईएमडी ने बुलेटिन में कहा, "अंडमान सागर के ऊपर चक्रवात बना हुआ है। इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान सागर के ऊपर 21 अक्तूबर को एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे बाद 23 अक्तूबर को उत्तर पश्चिम की तरफ इसका असर तेज हो जाएगा।"
चक्रवात का असर ओडिशा, बंगाल समेत इन राज्यों में दिखेगा
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा ने कहा, "आईएमडी ने इसकी भविष्यवाणी नहीं की है कि यह प्रणाली चक्रवाती तूफान में बदलेगा या नहीं। अक्तूबर को चक्रवात के महीने के तौर पर जाना जाता है। हम 10 से अधिक मौसम मॉडलों का आकलन करने के बाद किसी प्रणाली के मार्ग को पूर्वानुमान लगाते हैं, लेकिन अभी वहां कम दबाव का क्षेत्र बना नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि चक्रवात की भविष्यवाणी करना जल्दबाजी है। इस प्रणाली का असर उत्तरी आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय इलाकों पर पड़ने की संभावना है।
ओडिशा में बारिश की संभावना
मोहापात्रा ने कहा कि 23 से 25 अक्तूबर तक तट के आसपास समुद्र की स्थिति खराब रहेगी। इस दौरान ओडिशा के तटीय क्षेत्र में भारी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने मछुआरों को 21 अक्तूबर तक तट पर वापस लौटने के निर्देश दिए। आईएमडी महानिदेशक ने कहा कि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के ऊपर 21 अक्तूबर को कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि 21-22 अक्टूबर को पूर्वमध्य और इससे सटे दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी में 35-45 किमी प्रति घंटे से लेकर 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। इसके साथ ही दक्षिण ओडिशा, उत्तरी तटीय ओडिशा के जिले के एक या दो इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
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