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Weather Report: ज्यादा बारिश बनेगी आफत, इस रिपोर्ट ने बढ़ाई किसानों की चिंता; ओडिशा में वज्रपात से नौ की मौत

Sat, 17 Aug 2024 05:23 PM IST
बशु जैन डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्व में हुई अधिक बारिश से भारत में फसलों को नुकसान हुआ है। देश में करीब 40 फीसदी आबादी खेती और उससे जुड़े संसाधनों पर निर्भर है। 2015 से 2021 के बीच 33.9 मिलियन हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ। जबकि सूखे के कारण 35 मिलियन हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। ओडिशा में वज्रपात से नौ लोगों की मौत होने की खबर है।
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बारिश से फसल खराब होने का खतरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के कई राज्यों में इन दिनों तेज बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। भारत के मौसम विभाग ने भी इस वर्ष सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है। ओडिशा में वज्रपात के कारण नौ लोगों की मौत की खबर है।इसी बीच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने इनकम प्रोटेक्शन एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम : हाउ इंडिया इज बिल्डिंग क्लाइमेट रेजीलिएंस नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2015-2021 के बीच ज्यादा बारिश होने से करीब 34 मिलियन हेक्टेयर में फसलों को नुकसान हुआ है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई जब देश में एक जून से अब तक सामान्य से 5 फीसदी बारिश हो रही है। ऐसे में ये सवाल फिर उठ रहा है कि क्या इस बार भी ज्यादा बारिश से नुकसान होगा या नहीं?

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्व में हुई अधिक बारिश से भारत में फसलों को नुकसान हुआ है। देश में करीब 40 फीसदी आबादी खेती और उससे जुड़े संसाधनों पर निर्भर है। 2015 से 2021 के बीच 33.9 मिलियन हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ। जबकि सूखे के कारण 35 मिलियन हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई। देश में 2021 में 159 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, तेज बारिश और बाढ़ के मुकाबले सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को सूखे से होता है। जब भी ज्यादा बारिश होती तो इससे रबी की फसलों को ज्यादा फायदा होता है। ज्यादा बारिश और ज्यादा सूखा में से अक्सर ज्यादा सूखा ही किसानों के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक नुकसानदेह होता है, क्योंकि बारिश का प्रभाव कुछ दिनों तक ही रहता है। वहीं, सूखे का प्रभाव लंबी अवधि तक रहता है। वहीं, जिस साल ज्यादा बारिश होती है उस साल अक्सर रबी की फसल अच्छी रहती है। ऐसे में किसानों को काफी हद तक नुकसान की भरपाई हो जाती है। 
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हालांकि देश के कुछ राज्यों में इस साल भले ही ज्यादा बारिश हुई हो लेकिन पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से भी कम बारिश हुई है। ऐसे में हम कह सकते है कि कुछ राज्यों में ज्यादा बारिश हो रही है तो वह लंबी अवधि के लिए अच्छा है। क्योंकि इससे जल संग्रह बढ़ जाता है। जल का संग्रह बढ़ने से रबी की फसल को फायदा होता है।

ओडिशा में वज्रपात से नौ की मौत
ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में बिजली गिरने से नौ लोगों की मौत हो गई, वहीं 12 लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार की हालत नाजुक है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही स्थानीय प्रशासन को घायलों को मुफ्त और बेहतर इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

पूर्वी, मध्य भारत में अगले हफ्ते तेज वर्षा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल पर कम दबाव का क्षेत्र बना है जिसके और संघटित होने की संभावना है। इसके प्रभाव से अगले सप्ताह के दौरान पूर्वी और मध्य भारत में तेज बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा, अगले 2-3 दिनों के दौरान केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, 20 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में व्यापक रूप से हल्की/मध्यम वर्षा हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान में भी छिटपुट से लेकर व्यापक वर्षा होने की संभावना है।

केरल में भारी बारिश का अनुमान, ऑरेंज अलर्ट जारी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले पांच दिनों में केरल में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इसके चलते राज्य के चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। शुक्रवार को केरल के कई इलाकों में रुक-रुककर हल्की बारिश हुई। वहीं राज्य की मणिमाला और पंबा सहित विभिन्न नदियों में जलस्तर बढ़ गया। मौसम विज्ञान विभाग ने पथानामथिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की और एर्नाकुलम में बहुत भारी वर्षा का अनुमान जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

वहीं तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर में हल्की से मध्यम बारिश और 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। अधिकारियों ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने और जलाशय पार नहीं करने को कहा। 
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