संदेशखाली मामले पर अब कलकत्ता हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार और प्रवर्तन निदेशालय के बीच ठन गई है। दरअसल गुरुवार को हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार ने संदेशखाली मामले में केंद्रीय एजेंसियों की सजा दर पर सवाल उठाया है। उधर प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने टीएमसी पर जांच को आगे बढ़ाने में मदद ना करने का आरोप लगाया है।
महाधिवक्ता ने सीबीआई पर उठाए सवाल
दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट में संदेशखाली मामले को लेकर सुनवाई चल रही है। इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दावा किया कि जिस तरह का भरोसा केंद्रीय एजेंसियों पर जताया गया था, वह धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है।उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश पर एक जनहित याचिका दायर की जा सकती है, जिसमें यह बताया जाए कि पिछले दस वर्षों में कितनी सीबीआई जांच के आदेश दिए गए और उनके परिणाम क्या हैं?
उन्होंने सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की सजा दर के बारे में भी आश्चर्य जताया। किशोर दत्ता ने पूछा कि जो लोग संदेशखाली मुद्दे पर अदालत के सामने आए हैं, उन्होंने क्या शोध किया है? महाधिवक्ता के अनुसार संदेशखाली में कहीं भी सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं है और परिस्थितियां नियंत्रण में हैं। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि राज्य पुलिस को जांच करने की अनुमति दी जाए।
‘ईडी की मदद नहीं कर रही सरकार’
इस मामले में ईडी की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर मदद ना करने का आरोप लगाते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में केंद्रीय एजेंसियां जांच को कैसे आगे बढ़ा सकती हैं? उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल के कई मामलों में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच का आदेश दिया गया है, जिसमें 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा भी शामिल है।
‘सीबीआई को मिले सभी मामलों की जांच’
उधर संदेशखाली में पीड़ित याचिकाकर्ताओं की वकील प्रियंका टिबरेवाल ने जांच को सीबीआई को स्थानांतरित करने की अपील की। उन्होंने संदेशखाली में यौन अत्याचार और हिंसा से पीड़ितों लोगों की शिकायतें हाईकोर्ट के समक्ष रखीं। टिबेरवाल ने दावा किया कि फाइलों में महिलाओं से यौन उत्पीड़न वाले आरोपों की 100 से ज्यादा शिकायतें थी। प्रियंका ने अदालत से यह भी अपील की कि शिकायतों की जांच करने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक समिति का गठन किया जाए। इससे पहले सात मार्च को हाईकोर्ट ने प्रियंका टिबरेवाल को एक हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी थी, जिसमें कथित पीड़ितों के बयानों को रिकॉर्ड पर ला सकें।