केरल में हुए भूस्खलन में 132 लोग अब तक जान गवां चुके हैं। लगातार शवों को निकालने का काम जारी है। लेकिन इन आपदा ने सैकड़ों परिवारों की उम्मीदें, सपने और खुशियां छीन ली हैं। लोग अपनों की तलाश में अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालात यह हैं कि जब लोग अपनों का शव देखते तो सारी उम्मीदें टूट जाती हैं...बस रहा जाता है तो दर्द। दर्द अपने खास को खोने का, प्रकृति की बेरूखी और सिस्टम की अनदेखी का।
बुधवार को मेप्पाडी के फैमिली हेल्थ सेंटर और नीलांबुर के सरकारी अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा था। लोग अपनों के शव की पहचान करते नजर आए। इस दौरान पूरे अस्पताल में बस चीत्कारें गूंजती रहीं। लोगों ने शवों का नम आंखों से अंतिम संस्कार किया।
वायनाड में कुछ शवों का अंतिम संस्कार किया गया तो कुछ शवों को दफनाया गया। वायनाड के अंतिम संस्कार स्थल पर तो एक साथ जलती चिताओं के बीच गूंजती चीत्कार सुन हर आंख कुदरत की बेरूखी पर शोक मनाती नजर आई। वहीं मेप्पाडी जामा मस्जिद समिति ने शवों को दफनाने का इंतजाम किया है।
इतने बड़े हादसे के बाद वायनाड के लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि भूस्खलन के बाद अभी भी 180 लोग लापता हैं और 300 घर उजड़ गए हैं। प्रशासन का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
सरकारी स्कूलों के छात्र कर रहे मदद
भूस्खलन के बाद राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोगों की मदद के लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए हैं। इसमें सरकारी स्कूलों के छात्र लोगों की मदद कर रहे हैं। मेप्पाडी के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र शिविर में लोगों की भोजन कराने के साथ अन्य कार्य में मदद कर रहे हैं। एनएसएस और एनसीसी से जुड़े इन छात्रों को शिक्षक भी प्रेरित कर रहे हैं। एक छात्र एल्ड्रिया ने बताया कि घटना का शिकार हुए परिवारों की मदद करके खुशी हो रही है। छात्र अनंतमेघा ने बताया कि शिविरों में एनसीसी और एनएसएस के अलावा अन्य छात्र भी मदद कर रहे हैं।
छात्र मेलबिन ने बताया कि हम लोगों के लिए कपड़े छांट रहे हैं। मेप्पाडी की शिक्षिका मिनी ने कहा कि हम लोगों की हर तरह से मदद कर रहे हैं। हम सभी दुखी हैं। हम लोगों को सांत्वना दे रहे हैं। हमने भी अपने कुछ छात्रों को खोया है। हमें उनका कुछ पता नहीं चल रहा है। शिक्षिका ने बताया कि स्कूल में लगे शिविर में एक हजार लोग हैं। सभी की मदद की जा रही है।