भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं हैं। जब भी देश के इतिहास में सबके प्रिय नेता की बात चलेगी तो पहला नाम अटल जी का आयेगा, क्या विपक्ष, क्या समर्थक, क्या दुश्मन देश पाकिस्तान के राजनेता और क्या कश्मीर के जेहादी। अटल जी जब भी कुछ कहते थे दुनिया उन्हें सुनती थी।
जम्मू कश्मीर विवाद पर बातचीत करनी हो या पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना और फिर दुश्मनी का भी करारा कारगिल युद्ध जैसा जबाव देने की बात या फिर अपनी प्रतिद्वंद्वी नेता इंदिरा गांधी की प्रशंसा में दुर्गा कहना वह हर परीक्षा में खरे उतरते रहे। शायद यही वजह है कि वह सबके प्रिय नेता बने लेकिन वह अपनी जिंदगी में बहुत अकेले थे।
कई कविताओं में उनके अकेलेपन का दर्द झलकता भी रहा है लेकिन उन कविताओं में भी जिंदगी के जंग की कहानी भी होती थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात को कबूल भी किया था कि हां, मैं अकेला हूं और अकेला महसूस भी करता हूं, अकेले में तो हर कोई अकेला होता है लेकिन मैं भीड़ में अकेला महसूस करता हूं। खुद के अकेले होने की बात बिरले ही कबूल करते हैं। महान कवि और राजनेता रहे अटल जी अविवाहित हैं यह हर कोई जानता है लेकिन एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी बेबाकी से कबूला था कि अविवाहित हूं लेकिन कुंवारा नहीं हूं।
कवि हृदय, सहृदयी अटल जी जितना बेबाक लिखते थे उतनी ही बेबाकी से अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें भी कबूल लिया करते थे। अब वह कभी नहीं बोलेंगे लेकिन उनके बोल और जिंदगी के कुछ किस्से वह खुद भी चाव से सुनाया करते थे। जब भी उनसे शादी का जिक्र किया जाता था तो वह हमेशा कहते थे कि व्यस्तता के चलते उन्हें कभी शादी करने का अवसर ही नहीं मिला।
उनके करीबी लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की सेवा के लिए उन्होंने अविवाहित रहने का फैसला किया था। पूर्व पत्रकार राजीव शुक्ला को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे उनकी शादी को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा था, विवाह का मुहूर्त नहीं निकल पाया।'
इसी इंटरव्यू में उन्होंने कुबूल किया था कि, 'हां, अकेला महसूस तो करता हूं, भीड़ में भी अकेला महसूस करता हूं।'