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प्रवासी मजदूर और NRI भी डाल सकेंगे वोट!: सरकार के आश्वासन के बाद SC ने रद्द की एक दशक पुरानी सभी याचिकाएं

Tue, 01 Nov 2022 09:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि 2013 में  दाखिल जनहित याचिका में की गई मांग से सरकार और चुनाव आयोग सहमत हैं। ऐसे में इसका इंतजार नहीं किया जा सकता कि एनआरआई वोटिंग शुरू होने तक सुनवाई जारी रखें।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
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विस्तार
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सरकार की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन याचिकाओं को बंद कर दिया है, जिनमें एनआरआई और प्रवासी मजदूरों को डाक या प्रॉक्सी वोटिंग की अनुमति देने के लिए केंद्र और पोल पैनल को निर्देश देने की मांग की गई थी। ये याचिकाएं एक दशक से भी ज्यादा पुरानी थीं। 
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मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामले जिनके लिए चुनाव आयोग ने समिति का गठन किया और बाद में इस संबंध में विधेयक पेश किया। उन पर और समय खराब नहीं किया जाएगा। 

अदालत ने कहा कि 2013 में  दाखिल जनहित याचिका में की गई मांग से सरकार और चुनाव आयोग सहमत हैं। ऐसे में इसका इंतजार नहीं किया जा सकता कि एनआरआई वोटिंग शुरू होने तक सुनवाई जारी रखें। केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि पेश हुए। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि न सिर्फ एनआरआई भारतीयों कोबल्कि भारत में ही अपने राज्य से बाहर काम कर रहे लोगों को भी मतदान का मौका दिया जाएगा। 
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सरकार ने अदालत में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर भी विचार चल रहा है। ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे चुनाव प्रक्रिया की गोपनीयता प्रभावित न हो सके। कोर्ट ने इस पर संतुष्टि जताई। 

अदालत ने कहा कि अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने आश्वासन दिया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाया जाएगा कि बाहर रहने वाले व्यक्ति और प्रवासी मजदूर चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और चुनाव की गोपनीयता को बनाए रखते हुए मतदान की सुविधा का विस्तार किया जाएगा। पीठ ने आगे कहा, माफ करना..हम इन मामलों को अब बंद कर रहे हैं। ये मामले पिछले नौ-दस वर्षों से लंबित हैं। 

पीठ ने आगे कहा कि नागेंद्र चिंदम द्वारा दायर जनहित याचिका पर फरवरी 2013 में नोटिस जारी किया गया था और उसके बाद एनआरआई और प्रवासी श्रमिकों के लिए मतदान की सुविधा के तरीकों और साधनों को देखने के लिए चुनाव पैनल ने एक समिति का गठन किया था। समति ने अदालत में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। 
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