विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना की उम्मीदों को फिर झटका लगा है। मंदिर के प्रवेश द्वारों के चौड़ीकरण के साथ ही संतों-गरीबों के लिए अन्नक्षेत्र, सहज दर्शन, पूजा पद्धति में सुधार के साथ ही गंगा से बाबा दरबार को जोड़ने की योजनाएं गति पकड़तीं, इससे पहले ही सीईओ श्याम नारायण त्रिपाठी का तबादला कर दिया गया। त्रिपाठी के तबादले के बाद अन्य योजनाओं पर काम ठंडे बस्ते में जाने की आशंका बढ़ गई है।
लंबे समय से विश्वनाथ मंदिर में सीईओ की जिम्मेदारी जिले में दूसरे विभागों में तैनात अफसरों के हाथ प्रभार के ही रूप में रही है। इससे मंदिर की योजनाओं को गति नहीं मिल सकी। सिर्फ दक्षिणा विवाद के अलावा चढ़ावे में हेरीफेरी की शिकायतों की पड़ताल और हुंडियों की गिनती कराने में ही मंदिर प्रशासन उलझा रहा।
अखिलेश सरकार की विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर क्षेत्र के 37 भवनों को चिह्नित कर खरीदने की योजना तो बनाई गई लेकिन न तो सौदा कहीं तय हो सका और न बातचीत ही किसी स्तर पर पहुंच सकी। करीब दो महीने पहले राजस्व परिषद के सदस्य (न्यायिक) पर पर तैनात त्रिपाठी को सीईओ की जिम्मेदारी मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने दी थी। त्रिपाठी सीएस की पसंद के अफसर माने जाते रहे हैं। उनके यहां तैनाती के बाद जहां मंदिर के संकरे द्वारों को चौड़ा करने की दिशा में काम तेज हुआ और छत्ता द्वार, ढुंढिराज के जर्जर हिस्से को तोड़ने में सफलता मिली, वहीं वर्ष 2012 से लंबित जम्मू कोठी खरीदने के प्रस्ताव पर सौदा भी पक्का हो गया।
530 स्वायर मीटर के रकबा वाली कोठी सिर्फ 1.22 करोड़ में ही खरीद ली गई। अन्नक्षेत्र और अतिथिशाला खोलने की योजना पर भी काम शुरू हो गया था।
उल्लेखनीय है कि सीएस ने हाल में ही अपने काशी दौरे के समय कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम विजय किरण आनंद, सीईओ को बाबा के दरबार की योजनाओं को तेजी से पूरा कराने का निर्देश दिया था।