बीएचयू ट्रॉमा सेंटर और सर सुंदरलाल अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार की शाम को खत्म हो गई। सीनियर डॉक्टरों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके नुकसान की भरपाई वे करेंगे। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया और शाम छह बजे काम पर लौट आए।
हालांकि दो दिन की हड़ताल में मरीजों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। गुरुवार को ट्रॉमा सेंटर में ओपीडी और इमरजेंसी पूरी तरह ठप थी लेकिन शुक्रवार को सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीज देखे। उधर, सर सुंदरलाल अस्पताल में भी सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी चलाई। जूनियर डॉक्टर सिर्फ इमरजेंसी और आईसीयू में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
ध्यान हो कि बुधवार की रात ट्रॉमा सेंटर में बिरला हॉस्टल के छात्रों व जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट और धनवंतरि हॉस्टल में आगजनी व तोड़फोड़ के बाद बुधवार की देर रात से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। वे दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, सुरक्षा और आगजनी व तोड़फोड़ में हुए अपने नुकसान की भरपाई की मांग पर अड़े थे।
शाम छह बजे सभी जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए
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गुरुवार की देर रात तक ट्रॉमा सेंटर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस चौकी खोल दी गई। इस मामले में दोषी 26 छात्रों पर निलंबन और परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध की कार्रवाई के साथ ही उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया था। इन सबके बाद जूनियर डॉक्टरों के नुकसान की भरपाई का मामला ही अटका था।
हालांकि इस पर भी जिलाधिकारी ने उन्हें जल्द से जल्द इंश्योरेंस दिलाने का वादा किया था। बावजूद इसके जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी थी। शुक्रवार की दोपहर आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ल, एमएस डॉ. ओपी उपाध्याय समेत कई सीनियर डॉक्टर उन्हें मनाने पहुंचे।
उन्हें आश्वस्त किया कि अगर प्रशासन उनके नुकसान की भरपाई नहीं करेगा तो सीनियर डॉक्टर मिलकर उनकी क्षतिपूर्ति करेंगे। इसके बाद शाम छह बजे सभी जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए।
ट्रॉमा सेंटर में बच्ची की मौत
परिजनों का आरोप हड़ताल के कारण गई जान
वाराणसी (ब्यूरो)। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती पांच साल की दिव्यांशी की मौत शुक्रवार को भोर में करीब साढ़े तीन बजे हो गई। परिजनों का आरोप है कि हड़ताल और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते उनकी बच्ची की जान चली गई।
सारनाथ निवासी बच्ची के पिता अनिल कुमार गिरी ने बताया कि उनकी बेटी बुधवार की शाम छत से गिर गई थी। वे उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। बच्ची को रात में यहां भर्ती किया गया। उसी रात ट्रॉमा सेंटर में बवाल हो गया और जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए।
गुरुवार की रात बच्ची की तबीयत अचानक खराब हुई लेकिन ड्यूटी पर सीनियर डॉक्टर ही थे। कई बार डॉक्टरों को बुलाया लेकिन जो डॉक्टर ड्यूटी पर थे उन्होंने बहुत तवज्जो नहीं दी और आखिरकार उनकी बच्ची ने दम तोड़ दिया।