हालांकि यह सब मंदिर निर्माण ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन विहिप ने अपने स्तर पर दलित पुजारियों को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। विहिप नेताओं का ऐसा विश्वास है कि मंदिर निर्माण होने के बाद वहां दलित पुजारियों को रखा जा सकता है। इसके लिए विहिप का 'अर्यक पुरोहित विभाग' दलित समुदाय के लोगों को खास तरह की ट्रेनिंग दे रहा है। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार अभी ट्रस्ट गठित करने में जुटी है।
बंसल के अनुसार अर्यक पुरोहित विभाग के पास पुजारियों की सूची रहती है। कितने लोगों को पुजारी की ट्रेनिंग कब और कैसे देनी है, विभाग ही तय करता है। ट्रेनिंग के लिए कम से कम दो तीन माह का समय चाहिए। इस दौरान पुजारी की ट्रेनिंग ले रहे व्यक्ति को कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों से गुजरना पड़ता है। पूजा की विधि और मंदिर से जुड़े दूसरे कामकाज सिखाए जाते हैं। बारीकि से संस्कारों की विधि बताई जाती है। कई प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों का दौरा कराया जाता है।
बता दें कि नवंबर 1989 को जब राम मंदिर का शिलान्यास हो रहा था, तब पहली ईंट बिहार के दलित कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल के हाथों रखवाई गई थी। हालांकि उस वक्त इसके जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राम मंदिर आंदोलन के पीछे संपूर्ण हिंदू समाज खड़ा है। राम मंदिर का निर्माण होने के बाद वहां पर यदि दलित पुजारी की नियुक्ति होती है, तो विहिप को सबसे ज्यादा खुशी होगी।
यही वजह है कि विहिप दलित पुजारियों को तैयार करने में लंबे समय से जुटा हुआ है। विहिप में इसके लिए धर्माचार्य संपर्क विभाग और अर्चक पुरोहित विभाग बनाया गया है। अनुसूचित वर्ग के लोगों को पूजा-पाठ के लिए प्रशिक्षित कर पुजारी बनाने का अभियान शुरू किया गया है।