स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बुधवार को सोशल रिफॉर्म एंड रिसर्च आर्गेनाइजेशन (एसआरआरओ) की ओर से द्वितीय विश्व धर्म संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वर्चुअल मोड में आयोजित विश्व धर्म संवाद में हिंदू, सिख, जैन, मुस्लिम, यहूदी और बहाई धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया। अमर उजाला कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर रहा।
धर्म संवाद के मुख्य अतिथि स्वामी राघवानंद ने कहा कि धर्म दो अलग-अलग समुदाय के संस्कारों को साथ लाता है। आज समस्या यह है कि भगवान को सब मानते हैं, लेकिन भगवान की कही बातों को कोई नहीं मानता। वेद, कुरान, और बाइबल को सब मानते हैं, लेकिन उसकी सीख का पालन कोई नहीं करता।
वहीं सिख धर्म के सिंह साहिब ज्ञानी रणजीत सिंह ने कहा कि भारत में गुलदस्ते के फूलों की तरह अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं। हमें सभी धर्मों का आदर करना चाहिये। वहीं भारत में यहूदी धर्म के प्रमुख रब्बी ईजेकील इसहाक मालेकर ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि मंदिर में फूल चढ़ाने से पहले मन को महकाना जरूरी है। मंदिर में दीप जलाने के पहले घर में दीप जलाना सुनिश्चित होना चाहिए।
आर्य समाज के विनय आर्य ने कहा कि धर्म कभी मिट नहीं सकता। वहींबहाई धर्म की शिप्रा उपाध्याय ने कहा कि गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने शिक्षा में सुधार पर बल दिया। ब्रह्मकुमारी सपना दीदी ने कहा स्वामी विवेकानंद की जयंती पर विश्व धर्म संवाद का आयोजन संसार में निहित सभी धर्म, पंथ, संप्रदाय व प्रकृति को शांति के मार्ग पर साथ लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करेगा।
आर्क बिशप अनिल कुटो ने कहा कि पूरे विश्व में विभिन्न धर्म,पंथ संप्रदायों को मानने वाले सभी मनुष्य आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर चल कर ही, संपूर्ण विश्व को शांति, आपसी सद्भाव और प्रकृति प्रेम की ओर ले जा सकते हैं। इस्लाम धर्म के मौलाना सैयद हसन इमाम आबिदी ने कहा कि इंसानियत का धर्म सबसे बड़ा है, वह कभी अलग नहीं हो सकता है।
आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा स्वामी विवेकानंद ने अल्पायु में धर्म, दर्शन, जीवन, विश्व बंधुत्व जैसे विषयों पर महारत हासिल करने के साथ जो संदेश दिए वे आज भी मानवता के कल्याण की राह दिखाते हैं।
वहीं, प्रदीप भैया जी महाराज ने कहा कि धर्म ही सत्य है और सब अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक प्रमोद कुमार ने कहा कि अगले वर्ष 12 जनवरी 2023 को विशाल विश्व धर्म संवाद का आयोजन होगा। कार्यक्रम को लाइव प्रसारण करने में विश्व धर्म संवाद के उपाध्यक्ष डॉ. महेश चौधरी की अहम भूमिका रही। इस अवसर पर कात्यायनी चतुर्वेदी भी मौजूद रहीं।