पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है। इसे लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई में ममता सरकार के लापरवाह रवैये के प्रति सख्त नाराजगी प्रकट की।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने सोमवार को सीबीआई व एसआईटी द्वारा पेश जांच की प्रगति रिपोर्ट पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि अब तक मुआवजा नहीं देना एक गंभीर मामले को लेकर राज्य सरकार के लापरवाह रवैया को दर्शाता है।
बता दें, अगस्त में कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर हत्या, दुष्कर्म व अन्य गंभीर मामलों की जांच सीबीआई से कराने और बाकी मामलों की जांच बंगाल पुलिस की एसआईटी से कराने का आदेश दिया था। तभी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था। सोमवार को सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट की निगरानी में जारी जांच से जुड़ी पहली स्टेटस रिपोर्ट दायर की। यह मुहरबंद लिफाफे में दायर की गई है। मामले में अब अगली सुनवाई हाईकोर्ट आठ नवंबर को करेगी।
सीबीआई ने सात केसों में 40 एफआईआर दायर करने के बाद आरोप पत्र दायर किए हैं। वहीं बंगाल सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी को सहयोग करने के लिए 10 आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति पर भी कोर्ट ने ऐतराज जताया। राज्य सरकार ने कहा कि एसआईटी सदस्यों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद 10 आईपीएस अधिकारियों को नियुक्त किया गया।
बता दें, बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में कई जगह हिंसा, दुष्कर्म, आगजनी जैसी कई वारदातें हुईं। इसे लेकर जून में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक कमेटी गठित कर के चुनाव बाद हिंसा के सभी मामलों की जांच करने को कहा था। आयोग की सात सात सदस्यीय कमेटी ने 13 जुलाई को हाईकोर्ट में अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें हिंसा की सीबीआई जांच कराने व राज्य से बाहर सुनवाई समेत कई सिफारिशें की गईं थीं।
हत्या के 29, दुष्कर्म के 12 व लूटपाट के 940 मामले
मानवाधिकार आयोग की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नतीजे आने के बाद यानी दो मई से लेकर 20 जून के बीच बंगाल में हिंसा की 1934 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें हत्या की 29, दुष्कर्म की 12, और लूटपाट की 940 शिकायतें थीं। हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान पीड़ितों को सत्यापन के बाद अपराध के अनुसार राज्य की नीति के मुताबिक मुआवजा देने का निर्देश दिया था। यह भी कहा था कि मुआवजा राशि संबंधितों के सीधे बैंक खाते में जमा कराई जाए।