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वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन : 80 अखबारों के लिए लिखते थे कॉलम, 1997 में बने थे सांसद

Thu, 23 Aug 2018 12:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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kuldeep nayyar
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 वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का कल आधी रात के बाद यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। नई दिल्ली के लोदी रोड शमशान स्थल पर दोपहर एक बजे नैयर का शव लाया गया। इस मौके पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन राठौर, भाकपा सचिव डी राजा, कांग्रेस नेता मीम अफजल, नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, आल इंडिया अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष अशोक भारती समेत मीडिया जगत राजनीति और सामाजिक क्षेत्र की अनेक बड़ी हस्तियाँ और परिजन मित्र मौजूद थे। नैयर के शव का दाह संस्कार विद्युत शवदाहगृह में किया गया।

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14 अगस्त 1923 को नैयर का जन्म पंजाब के सियालकोट (अब पाकिस्तान) में ब्रिटिश इंडिया में हुआ था। उनके पिता का नाम राजीव नैयर और माता का नाम पूरण देवी था। उन्होंने फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज लाहौर से अंग्रेजी में बीए और लॉ कॉलेज लाहौर से एलएलबी किया था। उनके पिता सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील थे। 1952 में उन्होंने नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी की छात्रवृत्ति पर मेडिल स्कूल ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी।

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नैयर शुरुआत में उर्दू प्रेस रिपोर्टर थे। वह दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी अखबार द स्टेट्समैन के संपादक रह चुके हैं। आपातकाल को खत्म करने की आवाज उठाने के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा था। वह सामाजिक कार्यकर्ता के साथ ही शांति कार्यकर्ता भी थे। 1996 में संयुक्त राष्ट्र गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के वह सदस्य थे। उन्हें 1990 में ग्रेट ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। उन्हें अगस्त 1997 में राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया गया था।

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नैयर 14 भाषाओं में 80 अखबारों में कॉलम लिखा करते थे। जिसमें डेक्कन हेराल्ड, द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून, पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान, प्रभासाक्षी, द इंडियन एक्सप्रेस आदी हैं। साल 2000 से वह अपने शांति कार्यकर्ताओं से भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अमृतसर में स्थित अटारी-वाघा सीमा पर मोतबत्तियां जवाने के लिए कहा करते थे। वह पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीयों और भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानियों की रिहाई के लिए काम करते थे सजा पूरी करने के बावजूद जेल में बंद हैं।
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नैयर ने 15 किताबें लिखी हैं जिसमें बियॉन्ड द लाइन्स और इंडिया आफ्टर नेहरू प्रमुख हैं। वह राजनीतिक मुद्दों प बेबाकी से अपनी राय रखते थे। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन किया था। साल 2010 में पाकिस्तानी अखबार द डॉन में लिखे अपने एक लेख की वजह से उनकी काफी आलोचना हुई थी। उनका आरोप था कि आतंकवाद निरोधी दल के नेता हेमंत करकरे को हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने मार दिया था। इसकी वदह से उन्हें भारत विरोधी षड्यंत्र रचने का आरोपी ठहराया गया था। जुलाई 2011 में अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की थी कि नैयर ने सैयद गुलान नबीं द्वारा आयोजित और समर्थित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। इन सभी कार्यक्रमों को पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई फंड देती थी।

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1999 में उन्हें नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी ने अल्यूमिनी मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित किया था। साल 2003 में कुलदीप नैयर को एस्टर अवॉर्ड फोर प्रेस फ्रीडम और साल 2007 मे शहीद नियोगी अवॉर्ड फोर लाइफटाइम अचीवमेंट मिला था।

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