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Ayodhya Ram Temple: प्राण प्रतिष्ठा से पहले अमेरिका में उल्लास, 22 जनवरी को जश्न; USISPF प्रमुख ने कही यह बात

Sun, 14 Jan 2024 07:17 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर उल्लास का माहौल है। भारत के अलावा अमेरिका के बड़े शहरों में भी जश्न की तैयारी है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने तैयारियों और दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर विस्तार से बात की।
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USISPF के अध्यक्ष मुकेश अघी - फोटो : ANI
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विस्तार
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अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा होनी है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने बताया है कि दोनों देशों में इस मौके पर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में राम मंदिर के उद्घाटन और 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कई शहरों में उत्साह का माहौल दिख रहा है। लगभग एक दर्जन बड़े शहरों में धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी है। जनता मंदिर के उद्घाटन का जश्न मनाएगी।
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मुकेश अघी ने बताया कि न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर के साथ-साथ बोस्टन, वॉशिंगटन डीसी, लॉस एंजल्स  और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में भी कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि तमाम जगहों पर कार्यक्रम उसी समय होंगे, जब भारत में प्राण प्रतिष्ठा और राम मंदिर का उद्घाटन होगा। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय और अमेरिकी लोगों की संस्कृति, भावनात्मक, आर्थिक और धार्मिक रूप से जुड़ाव का पता चलता है। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों पर भी उन्होंने विस्तार से बातें कीं।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। व्यापार के दृष्टिकोण से देखें तो दोनों देश 200 बिलियन डॉलर के बिजनेस का आंकड़ा पहले ही पार कर चुके हैं। USISPF अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने कहा, दोनों देशों के बीच पर्याप्त मात्रा में सहयोग हो रहा है... अमेरिकी कंपनियां भारत में बाजार के अवसरों और चीन से आपूर्ति को जोखिम से मुक्त करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।
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FTA पर बंधे हैं अमेरिका के हाथ
आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावनाओं पर मुकेश अघी ने कहा, यह मुश्किल है क्योंकि बाइडन प्रशासन ने किसी भी देश के साथ आज तक कोई मुक्त व्यापार समझौता नहीं किया है। भारत उस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ सकता है, लेकिन अमेरिका में राजनीतिक सीमाएं उन्हें इस पर चर्चा की इजाजत नहीं देती।

बाइडन के भारत दौरे की उम्मीद
इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन पर मुकेश अघी ने कहा, क्वाड शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति बाइडन के आने की उम्मीद है। चुनौती यह है कि अमेरिका में जी7, जी20 और ब्रिक्स देशों का सम्मेलन है। इन नेताओं के कार्यक्रम मैनेज करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, लेकिन क्वाड भी महत्वपूर्ण है। हम उम्मीद करते हैं कि भारत में क्वाड समिट होने पर राष्ट्रपति बाइडन शिरकत करने का पूरा प्रयास करेंगे।

विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
मुकेश अघी ने कहा, 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत 7 फीसदी की आर्थिक गति बनाए रखे यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, भारत अपना 80% तेल आयात करता है, जिसका मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ता है। भारत-अमेरिका साझेदार और सहयोगी दोनों हैं। उदाहरण के लिए, भारत गाजा और यूक्रेन में युद्ध पीड़ितों को दवा की आपूर्ति कर रहा है। भारत के पास अरब सागर में जहाज हैं, लेकिन वह अमेरिका के साथ सहयोग कर रहा है। व्यापारिक जलमार्ग पर हूती विद्रोही और समुद्री डाकुओं का वर्चस्व न हो, इसे सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है। भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के बीच चर्चा और सहयोग जारी है।

दुनियाभर के देशों के प्रति भारत की नीति
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख अल नाहयान के बयान का जिक्र करते हुए यूएसआईएसपीएफ अध्यक्ष ने कहा, उनके संबोधन से यह संदेश जाता है कि वह भारत के महत्व को महसूस करते हैं। इससे बाकी दुनिया को संदेश जाता है कि भारत ने 7 अक्तूबर को इस्राइल पर हमास के हमले की निंदा करने के अलावा इस्राइल के प्रति समर्थन जताया है। इससे यह भी पता चलता है कि मुस्लिम देश भी भारत के करीबी मित्र हैं। भारत इन सभी देशों के साथ सहयोग करेगा। अपने हितों का ध्यान रखने के साथ-साथ भारत पूरी दुनिया में शांति प्रक्रिया में भी योगदान देगा।

चीन में अमेरिकी कंपनियों का उत्पीड़न बढ़ा
भारत-अमेरिका सप्लाई चेन को लेकर USISPF चीफ ने कहा, यह अमेरिकी कंपनियों के हित में है कि वे अपनी संपत्ति के साथ-साथ सप्लाई चेन की रक्षा करें। चीन में अमेरिकी कंपनियों का उत्पीड़न बढ़ा है। अमेरिका ऐसी वस्तुओं की आपूर्ति करने में सक्षम बनना चाहता है जो कुशल और प्रभावी हों, इसलिए भारत उनकी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। धीरे-धीरे कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं। मुद्दा केवल सप्लाई चेन का नहीं। बात उभरते भारतीय बाजार का लाभ उठाने की कोशिश का भी है। 100 मिलियन लोग समृद्ध भारतीय हैं। खरीदने की इनकी ताकत बाजार में इन कंपनियों के लिए अवसर पैदा करती है।

अब वाइब्रेंट इंडिया कहना होगा
गुजरात में आयोजित समिट- वाइब्रेंट गुजरात का जिक्र करते हुए मुकेश ने इसे बहुत महत्वपूर्ण आयोजन करार दिया। उन्होंने कहा कि अब इसे वाइब्रेंट इंडिया कहना होगा क्योंकि इसमें एक लाख से भी अधिक लोग भाग ले रहे हैं। 18 देशों का राजनीतिक नेतृत्व भी इस कार्यक्रम से जुड़ा है। USISPF की कार्यप्रणाली से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि व्यापार नीति के लिए गठित इस फोरम के चरित्र और मुद्रा में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के समक्ष छह मुद्दों को लेकर दोनों देश आमने-सामने थे। हालांकि, अब तमाम विवादों को दूर कर लिया गया है। व्यापार में सुधार के तरीकों पर मंथन
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से आपकी राजनीतिक सीमाएं हैं। यूएस मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए पर साइन नहीं कर सकता। इसलिए दोनों देशों के बीच अब इस बात पर चर्चा हुई है कि व्यापार में सुधार कैसे किए जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी है। मुकेश अघी के मुताबिक भारत और अमेरिका टैरिफ कम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। दोनों देश समझ चुके हैं कि रसभरी और स्ट्रॉबेरी (raspberries and strawberries) पर अड़े रहना बेमानी है।
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