समाजवादी पार्टी गैर यादव पिछड़ों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश में भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं की सपा में एंट्री भी हो चुकी है। कहा जा रहा है कि अखिलेश को यह सबक बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव की हार के बाद मिला है। जहां तेजस्वी यादव गैर यादव पिछड़ी जातियों को अपने साथ लाने में पिछड़ गए थे।
जानकार कहते हैं कि तेजस्वी यादव ने बिहार में अति पिछड़ी जातियों के बीच एनडीए की गहरी पैठ को कम करने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किए। उन्होंने बस इस समुदाय में कुछ टिकट बांट दिए और निश्चिंत से हो गए। हालांकि इस चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन भाजपा-जदयू गठबंधन के कारण वह सरकार नहीं बना पाई। लिहाजा अब जाति जनगणना की बात करके तेजस्वी उसी भूल को सुधारने में लगे हैं।
कहा यह भी जाता है कि अगड़ी जातियों के प्रभुत्व को जब लालू और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं ने तोड़ा तो यह जातियां पिछड़ा वर्ग के बैनर तले यादवों के साथ आईं, मगर यादवों के सत्ता में आने के बाद इनकी उपेक्षा होने लगी। जो बिहार में हुआ, वही यूपी में हुआ। इसलिए बिहार में नीतीश कुमार ने और यूपी में भाजपा ने इस वर्ग को साध लिया।