इस बार पांचों राज्यों के चुनाव में 25 साल से लेकर 94 साल की उम्र तक के प्रत्याशियों ने दावा ठोका था। यूपी में दो सबसे कम उम्र के विधायक भी चुने गए। इनमें एक ने गाजीपुर के सैदपुर सीट से चुनाव लड़ा था और दूसरे ने रायबरेली की हरचंदरपुर से। दोनों प्रत्याशियों की जीत हुई।
वहीं, दूसरी ओर पांचों राज्यों में कई ऐसे भी उम्मीदवार थे, जिनकी उम्र 75 साल से अधिक थी। हम आपको हर राज्य के सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार के बारे में बताने जा रहे हैं। ये पांच राज्यों के छह बुजुर्ग उम्मीदवारों में से इस बार पांच को हार मिली, जबकि एक उम्मीदवार जीतने में कामयाब हुए।
ये हैं सबसे बुजुर्ग प्रत्याशी
विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
1. मोबिन अहमद : यूपी के सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार मोबिन अहमद थे। उन्होंने 92 साल की उम्र में मऊ सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस सीट पर बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी समेत 13 प्रत्याशी थे। इतनी उम्र होने के बावजूद मोबिन ने सभी को टक्कर दी। वोट के मामले में चार प्रत्याशियों से आगे भी रहे। मोबिन को कुल 924 लोगों ने वोट दिया।
2. प्रकाश सिंह बादल : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पांचों राज्यों में सबसे अधिक उम्र के उम्मीदवार थे। बादल ने देश की आजादी के साल यानी 1947 में राजनीति में कदम रखा था। पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। केंद्रीय कृषि मंत्री भी रहे। अभी उनकी उम्र 94 साल है। इस उम्र में भी वह लंबी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
3. युमखाम इराबोट सिंह : मणिपुर के सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार वांखेही सीट से 82 साल के युमखाम इराबोट सिंह थे। युमखाम 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार उन्होंने एनपीपी के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि, दोबारा जीत हासिल करने में नाकामयाब रहे।
4. हीरा सिंह बिष्ट : उत्तराखंड में सबसे बुजुर्ग दो उम्मीदवार थे। दोनों की उम्र 81 साल थी। देहरादून की रायपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट को भाजपा के उमेश शर्मा ने हराया।
5. चिंता राम : उत्तराखंड में नैनीताल की रामनगर सीट से उत्तराखंड परिर्वतन पार्टी के उम्मीदवार चिंता राम की उम्र भी 81 साल है। चिंताराम भी चुनाव हार गए। उन्हें महज 335 मत मिले।
6. रवि नाईक : गोवा के सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री रवि नाईक थे। उनकी उम्र 75 साल है। उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन अपनी उम्र से महज दो ज्यादा मतों से ही विजयी हो पाए। मतलब रवि नाइक ने अपने प्रतिद्वंदी प्रत्याशी को कड़े मुकाबले में 77 वोटों से हराया। रवि नाईक का जन्म 18 सितंबर 1946 को गोवा के पोंडा में हुआ था। इनके पिता का नाम सीताराम नाईक था। 1984 में वह चुनाव जीते और गोवा विधान सभा के सदस्य बने। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। पांच जनवरी 1991 से 18 मई 1993 तक वह गोवा के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद दो अप्रैल 1994 से आठ अप्रैल 1994 तक दोबारा गोवा के मुख्यमंत्री बने।