यूपी में 10 से ज्यादा सीटें ऐसी रहीं जहां कांग्रेस को नोटा से भी कम वोट मिले हैं। यूपी के वोट शेयर की की बात की जाए तो NOTA के बटन पर 637,304 लोगों ने वोट किया, जो कुल वोट शेयर का 0.7% रहा।
उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 37 साल बाद प्रदेश में कोई सरकार फिर लौटी है और योगी दोबारा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यूपी की 403 विधानसभा सीटों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 273 सीटें मिली हैं। जबकि मुख्य विरोधी पार्टी समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन को 125 सीटें मिली हैं।
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इस चुनाव में जहां 42 साल में पहली बार भाजपा को 40 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल हुआ है। वहीं भाजपा की लहर में बसपा-कांग्रेस बिल्कुल साफ हो गई है। बसपा को जहां महज एक सीट मिली है वहीं कांग्रेस को दो सीटें मिली हैं। कांग्रेस के कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। वहीं कुछ उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।
नोटा ने डाला बड़ा असर
विधानसभा चुनाव में नोटा भी खूब चला है। ‘इनमें से कोई नहीं’ यानी नोटा का विकल्प चुनना कई सीटों के परिणाम पर बड़ा असर डालने वाला साबित हुआ। वोटर जब प्रत्याशी और पार्टियों के बारे में कोई निर्णय नहीं ले पाए तो लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया।
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यूपी के बदांयू जिले में सभी छह विधानसभा नौ हजार 87 लोगों ने नोटा को वोट किया है। इस वजह से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को खास नुकसान उठाना पड़ा। इसी तरह कानपुर की 10 विधानसभा सीटों पर हुई मतगणना में 46 ऐसे प्रत्याशी रहे जो नोटा से भी कम वोट हासिल कर पाए।
मुनव्वर राणा की बेटी उरूसा राणा
- फोटो : Amar Ujala
वो प्रत्याशी जिन्हें नोटा से भी कम वोट मिले
योगी के सीएम बनने पर यूपी छोड़ने की बात करने वाले शायर मुनव्वर राणा की बेटी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।
राणा की पुत्री उरूसा राणा उन्नाव के पुरवा से कांग्रेस की प्रत्याशी थीं। नतीजों में वे केवल पांचवें स्थान पर हैं।
उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले हैं। यहां पर 812 वोट नोटा के खाने में पड़े थे।
एटा की अलीगंज सीट पर सुभाष चंद्रा को 1031 वोट मिले। वहीं नोटा को 1263 वोट मिले।
औरेया सीट से कांग्रेस ने सरिता दोहारे को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें 1143 तो नोटा के पक्ष में 1192 वोट गए।
इसी तरह झांसी जिले की मऊरानीपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भगवान दास को महज 3323 वोट मिले हैं।
जबकि इस सीट से लोगों ने नोटा पर 3471 वोट डाले हैं।
बांदा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण
- फोटो : ECI
प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज सीट पर वीना रानी को 1501 तो जबकि नोटा के पक्ष में 1959 लोगों ने मतदान किया।
फिरोजाबाद विस सीट पर कांग्रेस से ज्यादा नोटा को वोट मिले। नोटा के हिस्से 1198 वोट आए जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संदीप तिवारी 1131 वोट ही पा सके।
बांदा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी लक्ष्मीनारायण को महज 1894 वोट मिले हैं। जबकि नोटा पर 1991 वोट डाले गए। यहां से भाजपा के प्रकाश द्विवेदी को 81,557 वोट मिले हैं।
फतेहपुर जिले की अयाह शाह विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर हेमलता मैदान में थीं, उन्हें 1753 वोट मिले वहीं नोटा के पक्ष में 1884 लोगों ने मतदान किया।
बबेरू सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी गजेंद्र सिंह पटेल महज 2112 वोट हासिल कर सके। जबकि नोटा पर 3047 वोट डाले गए।
नरैनी सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी पवन देवी को भी नोटा से कम वोट मिले। उन्हें जहां 1806 वोट मिले वहीं नोटा पर 3,420 वोट डाले गए।
आप के संयोजक और दिल्ली के मख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
किस पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले
पंजाब में रिकॉर्ड जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी का यूपी में बेहद खराब प्रदर्शन रहा। पार्टी उत्तर प्रदेश चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। गुरुवार शाम को उसका वोट शेयर नोटा से भी कम था।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार शाम सात बजे तक पार्टी का वोट शेयर 0.35 प्रतिशत था। जबकि शाम 7 बजे तक कुल मतों में नोटा का 0.69 प्रतिशत शामिल था।
इसी तरह गोवा, उत्तर प्रदेश और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में शिवसेना की करारी शिकस्त हुई है। इन चुनावों में पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं। गोवा में शिवसेना ने 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और सभी की जमानत जब्त हो गई है।
शिवसेना को गोवा की चार सीटों पर 100 से भी कम वोट मिले हैं। शिवसेना को 0.18 प्रतिशत वोट ही मिले हैं जबकि गोवा में नोटा को 1.12 फीसदी वोट मिले हैं।